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छात्राएं बिफरीं- विद्यालय में बदइंतजामी, नहीं मिलतीं सुविधाएं

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समरेर सीएचसी (बदायूं) में बीमार छात्रा से बात करते अधिकारी। संवाद - फोटो : BADAUN
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दातागंज (बदायूं)। गरीब परिवारों से जुड़ी छात्राओं को नि:शुल्क आवासीय तौर पर शिक्षा देने की सरकार की मंशा पर यहां पानी फिर रहा है। रविवार को मीडिया के सामने बीमार छात्राओं ने व्यवस्था की पोल खोल डाली। बताया, यहां भोजन की गुणवत्ता काफी कराब है। और तो और यूनिफार्म से लेकर जूते तक उन्हें कई साल से नहीं मिले हैं।
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अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के निर्धन छात्र-छात्राओं को बेहतर आवासीय शिक्षा निशुल्क उपलब्ध कराने को समाज कल्याण विभाग की ओर से राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। इन विद्यालयों में शिक्षा के साथ-साथ निशुल्क छात्रावास, पाठ्य पुस्तकें, यूनिफार्म, खेलकूद आदि की व्यवस्था सरकार करती है। जिले में राजकीय आश्रम पद्धति का एक ही विद्यालय है। यहां 370 छात्राएं पंजीकृत हैं। हर महीने सरकार छात्राओं की शिक्षा समेत अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए अच्छा बजट भी खर्च करती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर तस्वीर नहीं सुधर रही।
समरेर के इस विद्यालय में शिक्षा का स्तर भी काफी निम्न है। छात्रावास की सुविधा होने के बाद भी काफी संख्या में आस-पास के गांवों की छात्राएं रोजाना अपने घर चली जाती हैं। दूरदराज की छात्राओं का छात्रावास में ठहरना मजबूरी है। इनको भी यहां सुविधाएं नहीं मिलतीं। छात्राओं का कहना है कि काफी समय से यूनिफार्म और जूते नहीं मिले। रोजमर्रा के इस्तेमाल जैसे साबुन, तेल, टूथपेस्ट आदि भी उनको घरों से लाना पड़ता है। निशुल्क पुस्तकें भी नहीं मिलतीं। जो भोजन दिया जाता है उसकी गुणवत्ता बेहद खराब होती है।
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यहां सुविधाएं कम, अव्यवस्थाएं ज्यादा
काफी समय से यूनिफार्म और जूते नहीं मिले हैं। भोजन की गुणवत्ता खराब है। पुस्तकें भी खुद ही बाजार से खरीदनी पड़ती हैं। विद्यालय में जो सुविधाएं मिलनी चाहिए वह नहीं मिल रहीं।
-आरती
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ज्यादातर छात्राएं तो अपने घर चली जाती हैं। जिन छात्राओं के घर दूर हैं और आने-जाने का साधन नहीं है वही छात्रावास में रुकती हैं। विद्यालय में सुविधाएं कम अव्यवस्थाएं ज्यादा हैं।
-माधुरी
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दैनिक उपयोग का सामान तो घर से ही लाना होता है। विद्यालय में सिर्फ छात्रावास और भोजन की सुविधा मिली है। भोजन की गुणवत्ता खराब है। अधिकारी कभी इसकी जांच भी नहीं करते।
-तृप्ति
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विद्यालय में शिक्षा का स्तर ज्यादा अच्छा नहीं है। भोजन की गुणवत्ता भी ठीक नहीं है। कहा जाता है कि यहां छात्राओं को सभी आवासीय सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन यह बात गलत है।
-स्वाति
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विद्यालय काफी दूर-दराज होने के कारण अधिकारी कभी नहीं आते। एक तरह से यहां मनमानी सी होती है। शनिवार को काफी छात्राओं का व्रत न होता तो ज्यादा छात्राएं बीमार होतीं।-अंजली
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विद्यालय परिसर में गंदगी भी है। मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं मिलता। भोजन की गुणवत्ता की तो कभी जांच ही नहीं होती। निशुल्क मिलने वाले अन्य सुविधाएं भी नहीं हैं।
-काजल
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नवरात्र का व्रत न होता तो ज्यादा होती बीमार छात्राओं की संख्या
दातागंज। शनिवार को चैत्र नवरात्र का पहला दिन था। विद्यालय में काफी संख्या में छात्राओं का व्रत था। ऐसे में इन छात्राओं ने भोजन नहीं किया, अगर व्रत न होता तो बीमार होने वालों की संख्या काफी अधिक हो सकती थी।
शनिवार को विद्यालय में लौकी, आलू की सब्जी, अरहर की दाल, रोटी, चावल बने थे। जिन छात्राओं का व्रत था उनके घरों से फलाहार आ गया था। ऐसे में इन छात्राओं ने भोजन नहीं किया। वार्डन संख्या कश्यप और फार्मासिस्ट जशोधरा ने भी जो भोजन बना था उसकी गुणवत्ता को परखना उचित नहीं समझा। बताते हैं कि विद्यालय में भोजन का ठेका अलीगढ़ की एक संस्था के पास है। प्रति छात्रा प्रतिदिन भोजन पर 75 रुपये खर्च किए जाते हैं।
यहां भोजन करने के बाद छात्राओं की हालत बिगड़ने लगी तो विद्यालय स्टाफ ने जिला समाज कल्याण अधिकारी रामजनम को सूचना दी। उन्होंने समरेर सीएचसी प्रभारी डॉ. दिनेश गंगवार को बताया। रात में ही सीएचसी से टीम विद्यालय पहुंच गई। यहां 28 छात्राओं को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत समझी गई। बाकी छात्राएं प्राथमिक इलाज के बाद ही ठीक हो गईं।
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संशय बढ़ा : टीम को रसोई मे मिला ब्रांडेड सीलबंद सामान
दातागंज। आवासीय विद्यालय में भले ही भोजन करने के बाद 30 छात्राएं फूड प्वाइजनिंग से बीमार हो गई हों, लेकिन रविवार को सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन चंद्रशेखर मिश्रा के निर्देश पर जब नमूना भरने के लिए टीम विद्यालय की कैंटीन पहुंची तो वहां टीम को पैक्ड और ब्रांडेड खाने-पीने का सामान मिला। ऐसा लग रहा था कि यह सामान आननफानन में रसोई में शिफ्ट किया गया हो। जबकि खुले हुए मसाले, घी तेल आदि नहीं मिला। इसको लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। हालांकि टीम ने मौके से आठ सैंपल लिए हैं। इनमें आटा, दाल, चावल, रिफाइंड के साथ पकी हुई दाल, पके हुए चावल, पकी हुई आलू और लौकी की सब्जी के सैंपल शामिल हैं। टीम के सदस्यों को लौकी को लेकर कुछ संशय हुआ तो कच्ची लौकी को भी चेक किया गया, उसमें कोई खराबी नहीं पाई गई।
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बचा हुआ भोजन फेंकने और दाल में छिपकली गिरने की भी चर्चा
दातागंज। समरेर और दातागंज सीएचसी में भर्ती कुछ छात्राओं ने यह भी बताया कि उनकी साथियों की हालत बिगड़ने के बाद आनन-फानन में पका हुआ भोजन फेंक दिया गया। छात्राओं का यह भी कहना था कि भोजन करने के बाद जब वे बीमार होने लगीं तो यह भी चर्चा रही कि दाल में छिपकली गिर गई थी। हालांकि, किसी भी छात्रा ने यह अपनी आंखों से नहीं देखा। संवाद
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डीएम ने गठित की चार सदस्यों की जांच टीम
बदायूं। राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय में भोजन करने के बाद छात्राओं के बीमार होने के मामले को डीएम दीपा रंजन ने गंभीरता से लिया है। डीएम ने पूरे मामले में जांच के लिए चार सदस्यों की कमेटी का गठन किया है। कमेटी में सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन और जिला समाज कल्याण अधिकारी को भी रखा गया है जो प्रधानाचार्य के बतौर पहले से काम देख रहे हैं। जांच टीम हर पहलू की पड़ताल करेगी और अपनी रिपोर्ट डीएम को देगी। जांच की रिपोर्ट आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह जानकारी समाज कल्याण अधिकारी रामजनम ने दी।
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यह छात्राएं हुईं बीमार
अनुराधा, गौरी, रीना, सृष्टि, कविता, शिवा, निशा, आकांक्षा, भारती, सलोनी, काजल, सरिता, मधु सागर, सुनीति, अनुराधा, रोशनी, प्रगति, श्यामगीता, मोनिका, रीना, शिवांगी, आरती, अंजली, उलहैती, मधु व मंगला आदि।
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विद्यालय देखरेख मैं ही करता हूं। शनिवार रात छात्राओं के बीमार होने की सूचना पर समरेर सीएचसी से चिकित्सा टीम को भेजा गया था। मैं भी मौके पर पहुंचा था। 28 छात्राओं को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। छात्राएं बीमार क्यों हुईं इसकी जांच कराई जा रही है। अभी इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता।
-रामजनम, जिला समाज कल्याण अधिकारी
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विद्यालय से आठ सैंपल लिए गए हैं। मौके पर देखकर ऐसा नहीं लगा कि खाने-पीने का सामान खराब रहा होगा। रसोई भी साफ-सुथरी थी। रसोई में दाल, चावल, आटा सभी पैक्ड और ब्रांडेड था। लौकी की भी जांच की गई। सभी सैंपल जांच को भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
- चंद्रशेखर मिश्रा, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन

समरेर ब्लाक (बदायूं)स्थित विद्यालय में खाद्य पदार्थों का सैंपल लेते कर्मचारी। संवाद- फोटो : BADAUN

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