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BADAUN : ‘डर सबको लगता है’...पर ज्यादा लगे तो हो सकता है एंग्जायटी डिसऑर्डर

Thu, 21 Jul 2022 12:42 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं

सार

उत्तर प्रदेश के बदायूं में एंग्जायटी डिसऑर्डर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस समय जिला अस्पताल में आने वाले 70 प्रतिशत मरीज इस रोग से पीड़ित हैं।
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क्या होते हैं एंग्जायटी डिसऑर्डर के संकेत - फोटो : istock
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विस्तार
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इस दुनिया में सबको चिंता होती है, सबको किसी न किसी चीज या बात से डर लगता है, लेकिन लेकिन जब यह दोनों भावनाएं नियंत्रण से बाहर हो जाएं तो कहीं न कहीं यह ‘एंग्जायटी डिसऑर्डर’ की तरफ इशारा करता है। इस समय जिला अस्पताल में आने वाले करीब 70 प्रतिशत मरीज इसी रोग से पीड़ित आ रहे हैं।
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भागदौड़ वाले जीवन में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जिसे चिंता न हो या फिर कोई डर उसके मन में न हो। यह डर परिवार, नौकरी या व्यवसाय किसी से भी संबंधित हो सकता है। एक हद तक तो यह सामान्य बात है लेकिन जब यह जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए तो बात चिंताजनक है। ऐसे में व्यक्ति एंग्जायटी डिसऑर्डर का शिकार हो सकता है।

दरअसल, एंग्जायटी एक मानसिक रोग है, जिसमें रोगी को तेज बेचैनी के साथ नकारात्मक विचार, चिंता और डर का आभास होता है। अगर समय पर इसका सही इलाज न किया जाए तो यह बहुत खतरनाक हो सकता है और मिर्गी का कारण भी बन सकता है। इस डिसऑर्डर की समस्या यह है कि अक्सर इसके साथ अवसाद के लक्षण भी उभरने लगते हैं। जिला अस्पताल की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. सर्वेश कुमारी के अनुसार इस समय अस्पताल में ऐसे मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है।
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ये लक्षण आएं तो हो जाएं सावधान
बेवजह की चिंता करना
पुरानी बातों को याद करके बेचैन होना
जल्दी निराश हो जाना
हृदयगति में बढ़ोत्तरी होना
छाती में खिंचाव महसूस होना
सांस फूलना
लोगों के सामने जाने और बातचीत से डरना
जुनून की हद तक सफाई करना
बार-बार चीजों को सही करते रहना

साइकोथैरेपी समेत दवाओं से होता है इलाज
जिला अस्पताल की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. सर्वेश कुमारी बताती हैं कि एंग्जायटी डिसऑर्डर का इलाज दो तरीकों से किया जाता है। पहले मरीज को साइकोथैरेपी दी जाती है और यदि बीमारी ज्यादा है तो कुछ दवाओं का भी सहारा लिया जाता है। साइकोथैरेपी में कॉग्नेटिव बिहेवियर थैरेपी, माइंडफुलनेस थैरेपी, मेडिटेशन समेेत सपोर्टिव साइकोथैरेपी से मरीज का इलाज किया जाता है।

खानपान का भी रखें विशेष ध्यान
डॉ. सर्वेश कुमारी कहती हैं यदि ये एंग्जायटी के लक्षण नजर आएं तो सबसे पहले तो डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। इसके अलावा मरीज को ताजे फल और सब्जियों का सेवन करना चाहिए। केला, अंगूर और सेब जैसे फल मूड स्टेबलाइर का काम करते हैं। इनके सेवन से इस रोग में लाभ मिलता है। इसके अलावा पालक, गाजर आदि में एंटी स्ट्रेस और एंटी डिप्रेसिव गुण होते हें जो एंग्जायटी को दूर करने में मदद करता है।
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