बदायूं। दो दिन में दूसरी बार जिले में चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुल गई। साफ हो गया कि डॉक्टर और कर्मचारी किस स्तर तक मनमानी कर रहे हैं। संक्रामक रोगों के मौसम के बीच न सिर्फ ओपीडी से बल्कि हाजिरी लगाने के बाद अस्पताल से भी नदारद हो जा रहे हैं। एडी हेल्थ डॉ. दीपक अहोरी ने शनिवार को जिला और जिला महिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया तो एक बार फिर हकीकत सामने आ गई। दोपहर 12 से तीन बजे तक दोनों अस्पतालों के निरीक्षण में एडी हेल्थ ने कई कमियां पकड़ीं। जिसकी रिपोर्ट वह शासन को भेजेंगे।
बृहस्पतिवार को डीएम दीपा रंजन के निर्देश पर जिले भर के सरकारी अस्पतालों का प्रशासनिक अधिकारियों ने औचक निरीक्षण किया था। जिला महिला अस्पताल में एडीएम प्रशासन ऋतु पुनिया निरीक्षण को पहुंचीं तो यहां सीएमएस डॉ. रेखा रानी समेत 12 डॉक्टर और 37 कर्मचारी नदारद मिले थे। जिले के अन्य सीएचसी और पीएचसी पर भी ऐसा ही हाल मिला था। शनिवार को एडी हेल्थ डॉ. एडी अहोरी ने जिला और महिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया तो फिर कलई खुल गई। एडी हेल्थ पहले जिला अस्पताल पहुंचे। यहां उन्होंने ओपीडी, पोषण पुनर्वास केंद्र, पैथोलॉजी लैब, दवा स्टोर, इमरजेंसी आदि का निरीक्षण किया। रोगियों से भी बात की। कई स्थानों पर गंदगी मिलने पर नाराजगी जताई। सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम को सुधार के निर्देश दिए।
इसके बाद उन्होंने जिला महिला अस्पताल का निरीक्षण किया। यहां पाया कि कई डॉक्टर और कर्मचारी उपस्थिति पंजिका में उपस्थिति दर्ज करने के बाद चले गए। सीएमएस डॉ. रेखा रानी ने सफाई दी तो एडी हेल्थ ने सभी डॉक्टरों को तलब कर लिया। मालूम हुआ कि कई डॉक्टर अस्पताल में मौजूद नहीं है। संविदा के कर्मचारी भी नदारद थे। इस पर एडी हेल्थ ने नाराजगी जताई और सीएमएस को सुधार की ताकीद देते हुए सभी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।
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‘मैडम, आपका काम समझ में नहीं आया, कैसे चला रहीं हैं अस्पताल’
बदायूं। महिला अस्पताल में सीएमएस कार्यालय में ही जब स्टाफ की उपस्थिति और सीएमएस समेत कर्मचारियों की मनमानी की कलई खुली तो एडी हेल्थ का पारा चढ़ गया। डॉक्टरों और कर्मचारियों का हाजिरी रजिस्टर चेक करने और उनकी उपस्थिति देखने के बाद उन्होंने सीएमएस डॉ. रेखा रानी को निशाने पर ले लिया।
उन्होंने सीएमएस से कहा- मैडम, आपका काम समझ में नहीं आया। आप अस्पताल कैसे चला रही हैं। आपने कर्मचारियों को सिर चढ़ा रखा है, आप इस तरह की मनमानी नहीं कर सकतीं। सीएम और डिप्टी सीएम स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर हैं। उन्होंने सीएमएस के कक्ष में कई डॉक्टरों को तलब करने के बाद उनसे भी नाराजगी जताई। डॉ. कुमार वासु, डॉ. रुचि गुप्ता, डॉ. राबिया, डॉ. अनामिका को काम में सुधार लाने की चेतावनी दी। यह भी कहा कि अगर शासन की मंशा के अनुरूप लोगों को चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिलेंगी तो आपकी संविदा लंबी नहीं चलने वाली। एडी ने कहा कि वह अपनी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजेंगे। शासन की मंशा के अनुरूप काम न करने वाले अब नहीं टिक सकेंगे। वह कोई दूसरा ठिकाना देख लें, यही बेहतर होगा।
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‘आप खुद एसी में बैठी हो, रोगियों का बीपी तक नहीं जांचतीं’
सीएमएस के कार्यालय से निकलने के बाद एडी हेल्थ जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में पहुंचे। यहां डॉक्टरों के कक्ष में गए। रोगियों की बात की और दवाओं के साथ जांच के बारे में पूछा। देखा कि कई डॉक्टरों के कक्ष के बाहर रोगियों की लाइन लगी हैं, लेकिन उनका ब्लड प्रेशर तक नहीं नापा जा रहा। यहां डॉ. रुचि और डॉ. राबिया पर एडी हेल्थ बिफर गए। उन्होंने कहा डॉक्टर साहब आप कम से कम खुदा और भगवान से तो डरिए, खुद देखिए आप एसी में बैठी हो, लेकिन आप यहां आने वाली महिलाओं का ब्लड प्रेशर तक नहीं नाप रहीं।
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गंदी चादरें देख डॉक्टर से पूछा-आपके घर में ऐसी चादर प्रयोग होती हैं
जिला महिला अस्पताल के प्रसव कक्ष समेत अन्य कक्षों का निरीक्षण करते समय एडी हेल्थ की नजर गंदी चादरों पर पड़ी। इस पर उन्होंने सीएमएस डॉ. रेखा रानी और यहां ड्यूटी कर रहीं डॉक्टर से नाराजगी जताई। डॉक्टर से पूछा आपके घर में भी बेड पर ऐसी चादर इस्तेमाल होती हैं, क्या आप ऐसे बिस्तर पर सोती हैं। जिन महिलाओं का प्रसव सीजर से हुआ है उनकी भी आप दुर्दशा कर रहे हो। शासन इतनी सुविधाएं दे रहा है और आप यहां उसे ही बदनाम कर रही हैं। आपके खिलाफ शासन को लिखूंगा।
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प्रसूताओं से पूछा, भोजन कैसा मिल रहा
जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाले भोजन के बारे में भी एडी हेल्थ ने प्रसूताओं से सवाल किए। पूछा कि भोजन मिल रहा है, कैसे मिल रहा है। यहां भी झोल निकला। दोपहर करीब डेढ़ बजे का समय था। प्रसूताओं ने बताया कि सुबह दूध और रस्क मिले थे, लेकिन अब तक भोजन नहीं मिला है। इस पर एडी हेल्थ ने सीएमएस से सवाल किया तो वह कोई जवाब नहीं दे सकीं।
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अस्पतालों में परखी भोजन की गुणवत्ता
- निरीक्षण के दौरान एडी हेल्थ ने जिला अस्पताल में भोजन की गुणवत्ता को भी परखा। गौर करने की बात यह है कि वह करीब 12 बजे जिला अस्पताल पहुंचे और डेढ़ घंटे यहां रहे। इस दौरान रोगियों को दोपहर का भोजन दिया जाने लगा था। इसके बाद महिला अस्पताल पहुुंचे यहां प्रसूताओं को दोपहर के भोजन का वितरण भी शुरू नहीं हुआ था।
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एडी के निरीक्षण के दौरान इमरजेंसी में महिला से अभद्रता
बदायूं। जिला महिला अस्पताल में एक ओर एडी हेल्थ निरीक्षण कर रहे थे। दूसरी ओर इमरजेंसी में डॉक्टर ने एक महिला के साथ अभद्रता कर दी। महिला रोती हुई एडी हेल्थ के पास पहुंच गई, लेकिन सीएमएस डॉ. विजय बहादुर रात ने उसे बीच में ही रोककर मामले को संभाल लिया और महिला को अपने कक्ष में ले गए।
लखनपुर की अर्चना पटेल अपने पांच साल के बेटे नैतिक पटेल को लेकर शनिवार करीब एक बजे जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंची थीं। नैतिक को उल्टी-दस्त हो रहे थे। अर्चना का कहना है कि उनके बेटे की हालत काफी खराब थी। इससे वह परेशान थीं। बेटे को गोद में लेकर वह इमरजेंसी में कुर्सी पर बैठ गईं। उनके कुर्सी पर बैठने से डॉक्टर नाराज हो गए और बेटे का पर्चा बनाना बंद कर दिया। डॉक्टर ने बेटे को भर्ती करने से भी मना कर दिया और इमरजेंसी से उठकर चले गए। इसी दौरान नैतिक को बेहोशी आ गई। बदहवास अर्चना बेटे को गोद में लिए रोते हुए सीएमएस के पास दौड़ीं। गनीमत रही कि एडी हेल्थ उस समय तक यहां से महिला अस्पताल जाने के लिए कार में बैठ चुके थे।
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महिला अस्पताल की स्थिति बेहद खराब है। उपस्थिति पंजिका में हाजिरी लगी है। डॉक्टर और कर्मचारी नदारद हैं। सीएमएस व्यवस्थाएं नहीं संभाल पा रहीं। मैं समझ रहा हूं कि क्या हो रहा है। मनमानी किसी दशा में नहीं चलने दी जाएगी। स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाओं को लेकर शासन गंभीर है। सभी के खिलाफ कार्रवाई होगी। अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दूंगा।
-डॉ. दीपक अहोरी, एडी हेल्थ