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21 लाख डकारने वाले सात बाबुओं के खिलाफ सीबीआई कोर्ट में ट्रायल शुरू

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बदायूं। स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार की परतें नहीं खुलतीं। अगर खुलती हैं तो कार्रवाई के नाम पर एफआईआर में ही 18 साल तक लग जाते हैं। लखनऊ में हुई हालिया कार्रवाई के अलावा करीब 30 लाख के एक अन्य दवा घोटाले में सात भ्रष्टाचारियों के खिलाफ करीब 12 साल के बाद सीबीआई की विशेष अदालत में ट्रायल शुरू हो सका है। सीबीआई की विशेष शाखा देहरादून ने इस मामले में जांच की थी। सभी सात बाबू जमानत पर हैं और 21 लाख रुपये कोर्ट में जमा करके नौकरी भी कर रहे हैं। इतना जरूर है कि अब उनकी तैनाती बदायूं में नहीं है।
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प्रदेश में 2007 से 2012 के बीच मायावती की सरकार के दौरान एनआरएचएम में करोड़ों का घोटाला हुआ था। प्रदेश स्तर पर यह घोटाला उन दिनों सुर्खियों में तब आया जब लखनऊ में एक के बाद एक सीएमओ की संदिग्ध हालात में मौत हुई। एक सीएमओ की हत्या भी कर दी गई। जांच सीबीआई पर पहुंची तो घोटाले से बदायूं के तार जुड़ गए। इस मामले में सीबीआई जांच में बदायूं में तैनात आरबी यादव, शिशुपाल सिंह, रफत हुसैन, वेद गंगवार, राजेश राय, सुरेश चंद्र समेत सात बाबू आरोपी पाए गए।
सीबीआई की विशेष अदालत ने घोटाले की 21 लाख रुपये रकम जमा करने के बाद इन सातों बाबुओं को जमानत दे दी थी। इन सभी आरोपियों के खिलाफ सीबीआई की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद अब ट्रायल चल रहा है। सभी बाबू तबादले के बाद इन दिनों दूसरे जिलों में तैनात हैं।
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महिला अस्पताल की सीएमएम भी भ्रष्टाचार में आरोपी
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. रेखा रानी भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी हैं। दरअसल, सीएमएस ने नियम विरुद्ध अचल शर्मा नाम के एक कर्मचारी की तैनाती की है। इसके साथ ही मोहम्मद अशरफ नाम का रिटायर्ड बाबू भी करोड़ों के हेरफेर में आरोपी है। उसके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में जांच चल रही है। अचल शर्मा के खिलाफ एडी हेल्थ डॉ. दीपक अहोरी जांच कर रहे हैं। 2016 के इस भ्रष्टाचार के मामले में जांच आगे नहीं बढ़ रही। कोरोना की पहली लहर के दौरान बदायूं में तैनात रहे सीएमओ डॉ. यशपाल सिंह के खिलाफ कोरोना राहत को मिला फंड डकारने का आरोप है। उनके खिलाफ भी शासन स्तर से जांच चल रही है। एक अन्य सीएमओ रहे डॉ. नेमी चंद्रा के खिलाफ 2017 में हुए भर्ती घोटाले में जांच चल रही है।
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यह मामले मेरे समय के नहीं हैं। जो भी मामले हैं उनमें जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं। विधिक प्रक्रिया चल रही है। किस आरोपी की इन दिनों कहां तैनाती है इस बारे में भी मुझे जानकारी नहीं है। जानकारी जुटाने के बाद ही कुछ कह सकता हूं।
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-डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
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