बदायूं। संक्रामक रोगों ने दस्तक देदी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से संक्रामक रोग नियंत्रण अभियान शुरू कर दिया गया है। रैलियां निकालने के साथ गांव-गांव लोगों को संक्रामक रोगों के प्रति जागरूक किया जा रहा है, दूसरी ओर शासन और जिम्मेदारों का ध्यान अस्पतालों में डॉक्टरों खासकर विशेषज्ञों की कमी पर नहीं है। जिले में सीएचसी और पीएचसी को छोड़ दें तो जिला अस्पताल में ही पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं। जनरल फिजीशियन, हृदय रोग विशेषज्ञ की लंबे समय से तैनाती नहीं है। इतना ही नहीं सर्जन न होने के कारण ऑपरेशन भी नहीं हो पा रहे। ऐसे में लोगों को दिक्कत हो रही है।
जिला अस्पताल में गंभीर बीमारियों का इलाज नहीं हो पाता। इसका प्रमुख कारण यहां डॉक्टरों की कमी है। इमरजेंसी सेवाओं के नाम पर भी मानक पूरे नहीं हो रहे। इमरजेंसी में चार ईएमओ होने चाहिए, जबकि यहां दो ही ईएमओ हैं। पिछले वर्षों में कई स्पेशलिस्ट रिटायर हो गए, कुछ का तबादला हुआ तो कई ने वीआरएस लेकर खुद के अस्पताल खोल लिए। इनके स्थान पर शासन स्तर से डॉक्टरों की तैनाती नहीं हुई। इसका सीधा असर चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं पर दिख रहा है। जिला अस्पताल में 300 रोगियों को भर्ती करने की व्यवस्था है। संक्रामक रोगों के सीजन में ओपीडी में औसतन रोज 1200 से ज्यादा रोगी आते हैं। अस्पताल में डॉक्टरों के 29 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इसके सापेक्ष 10 पदों पर ही तैनाती है।
कुल तैनात डॉक्टरों में भी अक्सर कुछ अवकाश पर रहते हैं तो कुछ कोर्ट संबंधी कार्यों में व्यस्तता के कारण भी ओपीडी में नहीं बैठ पाते। पोस्टमार्टम ड्यूटी भी इन ही डॉक्टरों को करनी होती है। इसका असर भी ओपीडी सेवाओं पर साफ दिखता है। ऐसे में गंभीर बीमार रोगियों को यहां से रेफर करने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं रहता।
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ओपीडी में आते हैं 40 फीसदी से ज्यादा रोगी फिजीशियन संबंधी
ओपीडी में आने वाले कुल रोगियों में 40 फीसदी से ज्यादा फिजीशियन संबंधी होते हैं। अस्पताल में फिजीशियन के नाम पर डॉ. एसएन कमल की तैनाती है। वह भी अस्वस्थ हैं। लंबे समय के अवकाश के बाद लौटे हैं। सिर्फ एक फिजीशियन पर इतने रोगियों का भार रहता है। जनरल फिजीशियन की तैनाती नहीं है। डॉ. एसएन कमल के अक्सर खुद अस्वस्थ रहने के कारण भी ओपीडी में आने वाले रोगियों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञ डॉक्टर न होने के कारण ओपीडी में आने वाले रोगियों को सही इलाज नहीं मिल पाता।
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महिला अस्पताल की ओपीडी में भी बुरा हाल
जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में भी बुरा हाल है। गौर करने वाली बात यह है कि यहां पर्याप्त डॉक्टरों की तैनाती के बाद भी लाइन लगी रहती हैं। गर्मी बढ़ने के साथ नवजात और बच्चों को बीमारियां घेरने लगी हैं। बाल रोग विशेषज्ञ होने के बाद भी शिशुओं को दवा दिलाने के लिए माताओं को घंटों लाइन में लगना पड़ता है। बृहस्पतिवार को जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में महिलाएं बाल रोग विशेषज्ञ के इंतजार में परेशान नहीं। गर्भवती महिलाओं को भी स्त्री और प्रसूता रोग विशेषज्ञ का काफी इंतजार करना पड़ा।
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मरीजों और तीमारदारों ने कहा-करना पड़ता है लंबा इंतजार
अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टर का लंबा इंतजार करना पड़ा है। विशेषज्ञ डॉक्टर कौन से होते हैं यह हम गांव के लोगों को ज्यादा नहीं पता, हमें तो दवा मिल जाए इतना ही काफी है।
-धन देवी
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ओपीडी में लंबी लाइन लगती है। आज भी आधा घंटा से ज्यादा लाइन में खड़े हुए हो गया है। कुछ देर पहले डॉक्टर साहब उठ कर चले गए। लाइन में लगे लोग उनके वापस बैठने का इंतजार कर रहे हैं।
-रोशनी
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ओपीडी में महिलाओं के लिए ज्यादा समस्या होती है। महिलाओं के लिए अलग से लाइन भी नहीं लग रही। कई लोग बिना लाइन के ही डॉक्टर के पास चले जा रहे हैं, हम इंतजार में हैं।
-नीलम
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व्यवस्थाओं में सुधार होना चाहिए। इतनी बड़ी ओपीडी में दो डॉक्टर ही बैठे हैं। रोगियों को काफी देर तक लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है। डॉक्टर का दिखना और दवा लेना बड़ा काम हो गया है।
-पुत्तन
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जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के संबंध में शासन को समय-समय पर लिखा जाता है। विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। 40 फीसदी से ज्यादा रोगी फिजीशियन संबंधी होते हैं, लेकिन एक ही फिजीशियन है। सर्जन न होने के कारण ऑपरेशन भी नहीं हो पा रहे हैं। हृदय रोग विशेषज्ञ, न्यूरोलॉजिस्ट की लंबे समय से तैनाती नहीं है। हाल ही में त्वचा रोग विशेषज्ञ की तैनाती हो गई है।
-डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस