बदायूं। रविवार को अवकाश के बाद सोमवार को जब जिला अस्पताल खुला तो ओपीडी में रोगियों की भीड़ उमड़ पड़ी। एंटी रैबीज कक्ष के बाहर भी लाइन लगी नजर आई। ओपीडी में डॉक्टरों की कमी से रोगियों को काफी इंतजार करना पड़ा। इससे लोगों को समस्या हुई। जिला अस्पताल में फिजीशियन, त्वचा रोग विशेषज्ञ, कार्डियोलॉजिस्ट हैं ही नहीं। इसके अलावा तीन डॉक्टरों के छुट्टी पर चले जाने के कारण भी काफी समस्या हुई। कक्ष नंबर 21 में सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम ने खुद रोगियों को देखा।
बदलते मौसम में लोग वायरल फीवर के साथ खर्दी-खांसी-जुकाम के शिकार हो रहे हैं। बच्चों को निमोनिया जकड़ रहा है। जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाएं संतोषजनक नहीं हैं। सीएचसी और पीएचसी पर पहले से ही स्थिति खराब होने के कारण गांव-देहात से लोग भी जिला अस्पताल ही आते हैं। सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में आठ बजे से ही रोगियों का पहुंचना शुरू हो गया।
सोमवार को डॉ. सुकुमार अग्रवाल, डॉ. तेजपाल अवकाश पर थे। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कप्तान सिंह ने इनका अवकाश स्वीकृत किया था। इसके बाद डॉ. कप्तान सिंह भी अपनी सर्जरी कराने के लिए अवकाश पर चले गए। इसका खामियाजा रोगियों को भुगतना पड़ा।
ओपीडी में लगातार बढ़ रही भीड़ को देखते हुए सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम ने कक्ष नंबर 21 में रोगियों को देखा। इधर, सोमवार को ईएनटी डॉ. सिद्दीकी भी अवकाश लेकर चले गए। मंगलवार को भी जिला अस्पताल में रोगियों को परेशानियों का सामना करना होगा। सोमवार को सीएमएस को ही जिला अस्पताल में भर्ती रोगियों को भी देखना पड़ा।
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देहात से भी लगानी होती है जिला अस्पताल की दौड़
अगर गांव-देहात के स्तर पर सीएचसी, पीएचसी और उप स्वास्थ्य केंद्रों में ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलने लगें तो जिला अस्पताल पर दबाव कम हो जाएगा। सीएचसी, पीएचसी पर भी स्टाफ की कमी और एआरवी न होने के कारण लोगों को जिला अस्पताल आना होता है। गौर करने वाली बात यह है कि राजकीय मेडिकल कॉलेज में भी चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर नहीं हैं। उझानी के मोहम्मद आरिफ ने बताया कि अगर मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाएं ठीक होतीं तो बदायूं नहीं आना होता।
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यह बोले मरीज
सुबह दस बजे का आया हुआ हूं दोपहर के 12 बज चुके हैं अब तक लाइन में लगा हूं। ओपीडी में डॉक्टर भी दस बजे के करीब आए। अब तक लंबी लाइन हो चुकी है। रमजानपुर वापस भी जाना है।
-मनवीर
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अस्पतालों में अव्यवस्थाएं हैं, रोगियों की लाइनें लग रहीं हैं और डॉक्टरों की कमी है। गांव-देहात में इससे भी जयादा स्थिति खराब है। व्यवस्थाओं में काफी सुधार की जरूरत है।
-राकेश तोमर
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खेड़ा नवादा से आया हूूं अब तक लाइन में लगा हूं। डॉक्टर ही नहीं आए हैं। लाइन बढ़ती जा रही है। सरकारी अस्पतालों में गरीब आते हैं इसका ध्यान रखा जाना चाहिए ताकि समस्या कम हो।
-बुनियादी
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शहर से लेकर गांव-देहात तक स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। उझानी ने यहां आया हूं। पहले मेडिकल कॉलेज गया था वहां भी लंबी लाइन लगी थी। उझानी सीएचसी पर भी स्थिति खराब है।
-मोहम्मद आरिफ
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कई महीने से नहीं हो रहीं जिला अस्पताल में सर्जरी
कई महीनों से यहां सर्जरी का काम भी प्रभावित है। हालांकि, आर्थोपेडिक स्पेशलिस्ट और एक एनेथेस्टिक यहां हैं। ऐसे में हड्डी से जुड़े ऑपरेशन तो हो रहे हैं, लेकिन अन्य किसी तरह के ऑपरेशन नहीं हो रहे। करीब तीन महीने से यहां सर्जन नहीं है। सीएमएस के स्तर से कई बार शासन को लिखा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई व्यवस्था नहीं हुई है। ऐसे में लोगों को निजी अस्पतालों में जाना हो रहा है और ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। एक ही एनेथेस्टिक होने के कारण अगर वह अवकाश पर चले जाते हैं जो हड्डी से संबंधी ऑपरेशन भी प्रभावित होते हैं।
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20 साल से बंद पड़ा है हृदय रोग विभाग
जिला अस्पताल का हृदय रोग विभाग करीब 20 साल से बंद पड़ा है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में भी कार्डियोलॉजिस्ट नहीं है। निजी स्तर पर कार्डियोलॉजिस्ट की बात करें तो शहर में केवल डॉ. शरद कुमार गुप्ता ही हैं। ऐसे में हृदय रोगियों को मामूली समस्या होने पर भी बरेली की दौड़ लगानी होती है। निजी डॉक्टरों के यहां खर्च भी ज्यादा आता है ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग सही ढंग से इलाज भी नहीं करा पाता। इन 20 साल में हृदय रोग विभाग लगभग अपना अस्तित्व तक खो चुका है। इसे कभी डेंगू वार्ड तो कभी सेफ हाउस में तब्दील कर दिया जाता है। ऑक्सीजन प्लांट का चेंजओवर भी यहीं लगाया गया है।
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सोमवार के दिन रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। इन दिनों सुबह दो घंटे के लिए फार्मासिस्ट भी हड़ताल पर रह रहे हैं। इसके अलावा डॉ. सुकुमार अग्रवाल, डॉ. तेजपाल और डॉ. कप्तान सिंह भी अवकाश पर चले गए हैं। अस्पताल में डॉक्टरों की पहले से कमी है। अस्पताल आने वाले रोगियों को समस्या न हो इसके लिए मैंने खुद रोगियों को दखा है।
- डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस