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हाईरिस्क 100 में से 25 गांवों में फैला मलेरिया, हालात हो रहे बेकाबू

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बदायूं। जिले में मलेरिया की स्थिति फिर से वर्ष 2018 और 2019 की तरह बेकाबू होती नजर आ रही है। हाईरिस्क गांवों में लगातार मलेरिया के मामले सामने आ रहे हैं। जानलेवा फैल्सीपेरम मलेरिया ने भी दस्तक दे दी है। पांच ब्लॉक के हाईरिस्क 100 गांवों में से अब तक 25 से ज्यादा गांव मलेरिया की चपेट में आ चुके हैं। इन गांवों में वाईवैक्स और फैल्सीपेरम मलेरिया के काफी मरीज मिल चुके हैं। हालांकि, अधिकारी हालात सामान्य होने का दावा कर रहे हैं।
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नेशनल वेक्टर बॉर्न डिसीज कंट्रोल प्रोग्राम की वर्ष 2019 की रिपोर्ट में मलेरिया के प्रकोप और मौतों के मामले में बदायूं को प्रदेश में दूसरे नंबर पर रखा गया था। रिपोर्ट में जिले के पांच ब्लॉक के 100 से ज्यादा गांवों को मलेरिया के लिहाज से हाईरिस्क श्रेणी में शामिल किया गया था। इन गांवों पर ज्यादा फोकस भी किया गया। इसके बावजूद इस साल भी हालात बेकाबू हो रहे हैं। आमतौर पर मलेरिया का सीजन अगस्त से अक्तूबर तक का माना जाता है। वर्ष 2020 के सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो जुलाई खत्म होने तक ही जिले में मलेरिया के 2050 मरीज मिल चुके हैं। मानसून के साथ मलेरिया का सीजन शुरू हुआ तो अगस्त में हालात और भी बिगड़ गए।
मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम को तमाम जागरूकता कार्यक्रमों के साथ ग्राम पंचायत स्तर पर स्वच्छता और स्वास्थ्य समितियों को भी हर साल मोटा बजट मुहैया कराया जाता है। हर साल संक्रामक रोग नियंत्रण अभियान भी चलाया जाता है। गौर करने वाली बात यह है कि इस बार मच्छर जनित और संक्रामक बीमारियों की रोकथाम में स्वास्थ्य और चिकित्सा समेत 10 विभागों को लगाया गया है। इसके बावजूद जिले की स्थिति चिंताजनक है।
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इन गांवों में मलेरिया का प्रकोप
ब्लॉक जगत- बेला,पड़ौलिया, रायपुर, ललबुझिया, अंती नगला, रहमा, मलगांव, गिधौल, जगुआसाई, मौजमपुर, सरौरा नगला, मर्रई, बरसुनिया, रूपपुर, नरेली, महोरा, मूसाझाग, चमरौलिया, रुखड़ा खौला।
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ब्लॉक दातागंज- भैरो नगला, मुड़सेना, सराय पिपरिया, बक्सेना।
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