बदायूं। कोविड-19 के खतरे के बीच संक्रामक रोगों की दस्तक को लेकर शासन भी गंभीर है। मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, डायरिया को लेकर स्थानीय स्तर पर तैयारियां तो पहले से हो रही हैं लेकिन इनके नतीजे अच्छे नहीं आ रहे। ऐसे में बदायूं के हालात को लेकर शासन भी गंभीर है। मंडल स्तर पर जिलों की समीक्षा बैठक के बाद अपर मुख्य सचिव चिकित्सा और परिवार कल्याण ने बदायूं को लेकर जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं। इसके बाद स्थानीय स्तर पर काम और तेज हो गया है।
संक्रामक रोगों को लेकर जिले का रिकार्ड अच्छा नहीं है। पांच ब्लॉक के सौ से ज्यादा गांव हाई रिस्क श्रेणी में हैं। पिछले वर्ष इन गांवों में मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया ने कहर बरपाया था। जिले में 20 हजार से ज्यादा मलेरिया रोगी मिले थे। मलेरिया का सबसे ज्यादा प्रकोप जगत, म्याऊं, समरेर, सालारपुर और उसावां ब्लॉक के गांवों में रहा। हालात इतने खराब हो गए कि मलेरिया के प्रकोप के मामले में बदायूं प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहा था। मलेरिया का सीजन शुरू होने से पहले ही इन पांच ब्लॉक के एक दर्जन से ज्यादा गांवों में मलेरिया दस्तक दे चुका है। अब तक सैकड़ों मरीज मिल चुके हैं। ऐसे में शासन स्तर से बदायूं को लेकर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। मंगलवार को बरेली मंडल के जिलों की समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव चिकित्सा और परिवार कल्याण अमित मोहन ने बदायूं के हालात की समीक्षा की। जिले में अब तक संक्रामक रोग नियंत्रण कंट्रोल रूम न बनाए जाने पर भी अपर मुख्य सचिव ने हैरानी जताई। समीक्षा बैठक में संक्रामक रोगों की रोकथाम को लेकर उन्होंने जरूरी दिशा निर्देश दिए। इसके बाद स्थानीय स्तर पर काम तेज हो गया है।
पिछले साल सीएमओं को किया गया था निलंबित
स्वास्थ्य विभाग के स्तर से संक्रामक रोगों की रोकथाम में हर साल लापरवाही सामने आती है। पिछले वर्ष जिले में मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया का प्रकोप बड़े स्तर पर फैल गया था। संक्रामक रोगों की रोकथाम में तत्कालीन सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद की लापरवाही सामने आने के बाद शासन स्तर से सीएमओ को निलंबित कर दिया गया था। इसके बावजूद हालात काबू में करने में स्वास्थ्य विभाग के पसीने छूट गए थे। इस वर्ष पहले से तैयारियां होने के बावजूद मलेरिया के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
जनवरी से अप्रैल के बीच भी निकले केस
जनवरी से मार्च तक मौसम ठंडा रहता है। अप्रैल से तापमान में वृद्घि होने लगती है। आमतौर पर इस दौरान मलेरिया के मामले सामने नहीं आते लेकिन इस बार जनवरी से अप्रैल के बीच भी मलेरिया के मामले सामने आए हैं। बारिश का सीजन शुरू होते ही 13 मामले फैल्सीपेरम मलेरिया के भी मिले। पीवी कैटेगरी मलेरिया के करीब 300 केस मिले। ऐसे में बारिश का सीजन शुरू होने के साथ स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। मलेरिया प्रभावित गांवों में फैमिली हेल्थ इंडिया के सहयोग से जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
संक्रामक रोगों, खासकर मच्छरजनित रोगों की रोकथाम के लिए सभी जिलों को जरूरी दिशा निर्देश दिए गए हैं। बदायूं और बरेली पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। फिलहाल स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। रोग पैर न पसारें, इसके लिए पूरी सावधानी बरती जा रही है।
- जीएस नौगोई, एडी हेल्थ