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निजी अस्पतालों को देना होगा क्षय रोगियों व प्रसव का ब्योरा, तब होगा नवीनीकरण

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बदायूं। शासन ने निजी अस्पतालों के नवीनीकरण के नियमों में बदलाव कर दिया है। नए साल में निजी अस्पतालों का नवीनीकरण नए नियमों के तहत ही होगा। ऐसा न करने वाले अस्पतालों के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। निजी अस्पतालों को अब नवीनीकरण के लिए आवेदन करने के साथ यह भी ब्योरा देना होगा कि उन्होंने एक साल में अपने यहां कितने संस्थागत प्रसव किए। इसके अलावा इस दौरान कितने क्षय रोगी उनके यहां आए। इस सबका पूरा ब्योरा देना होगा।
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केंद्र सरकार भारत को 2020 तक क्षय रोग मुक्त करने की मुहिम चला रही है। इसके साथ ही मातृ-शिशु मृत्यु दर के आंकड़ों को कम करने के लिए संस्थागत प्रसव पर जोर दे रही है। सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने पर जननी सुरक्षा योजना, जननी शिशु सुरक्षा योजना के तहत प्रोत्साहन राशि के साथ पोषाहार देने की भी व्यवस्था है। भारत को क्षय रोग मुक्त करने के लिए राज्यपाल के आह्वान पर पूरे प्रदेश में 18 वर्ष तक के क्षय रोगी बच्चों को गोद लेने का कार्यक्रम चल रहा है। सरकारी अस्पतालों में आने वाले क्षय रोगियों के आंकड़े तो आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले क्षय रोगियों के आंकड़े न मिलने से मुहिम को झटका लग रहा है। ऐसे में अब सरकार ने इसको प्राथमिकता दी है। सचिव चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं वी हेकाली झिमोमी की ओर से इस संबंध में सीएमओ को आदेश जारी किया गया है। आदेश में स्पष्ट किया कहा गया है कि निजी अस्पतालों के नवीनीकरण में उनसे एक साल में संस्थागत प्रसव और इलाज कराने वाले क्षय रोगियों की भी सूचनाएं ली जाएं। उन्हीं निजी अस्पतालों का नवीनीकरण किया जाए जो एक जनवरी से 31 दिसंबर 2019 तक की सूचनाएं देते हैं।
नए आदेश के बाद अब निजी अस्पतालों को नवीनीकरण आवेदन के साथ क्षय रोगियों के साथ संस्थागत का ब्योरा भी देना होगा। गौर करने वाली बात यह है कि कई निजी अस्पतालों को इसमें समस्या हो सकती है। इन अस्पतालों में इलाज कराने वाले क्षय रोगियों का ब्योरा नहीं जुटाया जा रहा है। इसके साथ ही प्रसव कराने वाली महिलाओं का ब्योरा एकत्र करना भी अस्पतालों के सामने चुनौती होगी।
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शासन ने निजी अस्पतालों के नवीनीकरण में कुछ बदलाव किए हैं। नवीनीकरण के लिए आवेदन करने वाले निजी अस्पतालों को अब एक जनवरी से 31 दिसंबर 2019 तक अपने यहां संस्थागत प्रसव के ब्योरा के साथ इलाज कराने वाले क्षय रोगियों का भी पूरा ब्योरा देना होगा। ब्योरा न देने वाले निजी अस्पतालों का नवीनीकरण नहीं हो सकेगा।
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- डॉ. मंजीत सिंह, सीएमओ
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