बदायूं। प्रयोगशाला से आई मच्छरों की जांच रिपोर्ट के बाद जिले में बुखार से हो रहीं मौतों से काफी हद तक पर्दा उठ गया है। जिले में घातक एनोफिलीज प्रजाति के मच्छरों की फौज पनप रही है। इस मच्छर में पाया जाने वाला प्लाज्मोडियम नाम का परजीवी मौतों के लिए काफी हद तक जिम्मेदार माना जा रहा है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने अब तक अधिकारिक रूप से जिले में एक भी मौत होने की बात स्वीकार नहीं की है। ताज्जुब की बात ये है कि विभाग को डेंगू के लिए जिम्मेदार एडीज प्रजाति का एक भी मच्छर यहां नहीं मिला है।
जिले में करीब एक महीने पहले बुखार का प्रकोप शुरू हुआ था। जगत, समरेर, दातागंज, बिनावर ब्लॉक में बुखार का सबसे ज्यादा प्रकोप है। अब तक जिले में सौ से ज्यादा लोगों की बुखार से मौत हो चुकी है। बुखार से मौतों के बीच स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग ने पिछले दिनों जिले भर में अलग-अलग स्थानों से 284 जीवित मच्छरों को पकड़कर जांच के लिए लखनऊ और बरेली प्रयोगशाला भेजा था। प्रयोगशालाओं से आई मच्छरों की जांच रिपोर्ट से साफ हो गया है कि जिले में पनपी एनोफिलीज प्रजाति के मच्छरों की फौज ने प्लाज्मोडियम वाइवैक्स और फैल्सीपेरम परजीवी का ऐसा संक्रमण फैलाया कि लोग वाइवैक्स और फैल्सीपेरम मलेरिया का शिकार होते चले गए। जिन प्रजाति के सबसे ज्यादा मच्छर मिले हैं उनमें एनोफिलीज और क्यूलेक्स मच्छर की प्रजाति शामिल है। एनोफिलीज प्रजाति के मच्छर में प्लाज्मोडियम वाइवैक्स और फैल्सीपेरम परजीवी की पुष्टि भी प्रयोगशाला से की गई है। यही परजीवी मलेरिया और फैल्सीपेरम मलेरिया के लिए जिम्मेदार होते हैं। संक्रमित व्यक्ति को मच्छर द्वारा काटने के बाद वह अगर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो यह परजीवी उसके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
जांच में नहीं मिला एडीज प्रजाति का मच्छर
प्रयोगशाला से जिन 284 मच्छरों की जांच रिपोर्ट आई है उनमें पीएफ (प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम) और पीवी (प्लाज्मोडियम वाइवैक्स) मलेरिया फैलानेे वाले मच्छर तो मिले हैं, लेकिन राहत की बात यह है कि इनमें एक भी मच्छर एडीज एजिप्टी प्रजाति का नहीं मिला है। दरअसल, एडीज प्रजाति का मादा मच्छर ही डेंगू के लिए जिम्मेदार होता है। इस मच्छर में पाया जाने वाला परजीवी जीवाणु सात से 14 दिन में असर दिखाता है। मलेरिया, फैल्सीपेरम मलेरिया से कहीं ज्यादा घातक डेंगू का बुखार होता है।
ठहरे हुए पानी में पनपता है एनोफिलीज प्रजाति का मच्छर
प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद यह भी साफ हो गया है कि मलेरिया के प्रकोप की एक वजह गंदगी भी है। दरअसल, एनोफिलीज प्रजाति का जो मच्छर फैल्सीपेरम मलेरिया के संक्रमण के लिए जिम्मेदार है वह ठहरे हुए पानी में पनपता है। अब तक जिले में जिन स्थानों से भी फैल्सीपेरम मलेरिया के ज्यादा मामले सामने आए हैं वहां मलेरिया और स्वास्थ्य विभाग ने नए सिरे से लार्वा नष्ट करने के लिए अभियान शुरू कर दिया है। ग्रामीणों को भी जागरूक किया जा रहा है कि वे घरों के आसपास पानी जमा न होने दें। मच्छर जनित बीमारियों से बचने के लिए अन्य जरूरी उपायों के बारे में भी बताया जा रहा है।
जिले भर से बुखार प्रभावित इलाकों में अभियान चलाकर 284 मच्छरों को पकड़कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया था। इनकी जांच रिपोर्ट आ गई है। ज्यादातर मच्छर एनोफिलीज प्रजाति के मिले हैं। यही मच्छर मलेरिया और फैल्सीपेरम मलेरिया के परजीवी प्लाज्मोडियम के वाहक होते हैं। डेंगू फैलाने वाला एडीज प्रजाति का अभी कोई मच्छर नहीं मिला है। प्रभावित इलाकों में एंटीलार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। फागिंग और मच्छर नाशक दवाओं का छिड़काव भी कराया जा रहा है।
- डॉ. वीके शर्मा, जिला मलेरिया अधिकारी
मलेरिया विभाग ने जिले में अलग-अलग स्थानों से मच्छरों को पकड़कर जांच के लिए भेजा था। जांच रिपोर्ट आ गई है। इसके अनुसार जिले में एनोफिलीज प्रजाति में प्लाज्मोडियम वाइवैक्स और फैल्सीपेरम के परजीवी मिले हैं। जिले भर में अभियान चलाकर लार्वा नष्ट किया जा रहा है। लोगों को मच्छर जनित बीमारियों के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में कैंप कर रही हैं।
- डॉ. मंजीत सिंह, प्रभारी सीएमओ
इस समय मच्छरों से बचाव की बेहद आवश्यकता है। इसके लिए घरों में पानी न इकठ़्ठा होने दें, साथ ही घर में सफाई रखें। सोने वाले कमरे, खासकर जहां बच्चे हों वहां क्वाइल, मॉस्क्यूटो रिफिल आदि का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। सबसे सुरक्षित मच्छरदानी है। फिर भी यदि बच्चों को मच्छर काट ले और बुखार आ जाए तो जांच अवश्य कराएं। बिना जांच और डॉक्टर की सलाह के दवा न दें।
डॉ. राजीव रोहतगी, बाल रोग विशेषज्ञ
इलाज से बेहतर सावधानी है। इसलिए पहले मच्छरों से सुरक्षा रखें। घर में लार्वा न पनपने दें। इसके लिए छतों पर पड़े टायर, बर्तन, कूलर आदि में पानी न एकत्र होने दें। यदि फिर भी संक्रमित मच्छर काट ले और बुखार आ जाए तो घर के डॉक्टर न बनें। तुरंत डॉक्टर को दिखाएं और यदि डॉक्टर जांच की सलाह दे तो जांच तुरंत कराएं। प्लेटलेट्स कम हो जाएं तो घबराए नहीं, डॉक्टर से परामर्श लेकर उन पर अमल करें।
डॉ. सचिन गुप्ता, फिजीशियन