बदायूं। मां की गोद से बढ़कर सुरक्षित जगह बच्चे के लिए कुछ नहीं होती। खासकर, नवजात के लिए तो यह बात सौ फीसदी फिट बैठती है। जो मां नौ माह बच्चे को अपने पेट में सुरक्षित रखती है और पैदा होते ही अगर कुछ बीमारी उसे घेर लेती है, तो ऐसे बच्चों को मां से दूर हटाकर मशीनों के सहारे छोड़ दिया जाता है। मां से दूर होकर मशीन पर जाते ही बच्चे के बचने की संभावना 40 प्रतिशत तक कम हो जाती है। डॉक्टरों की समय-समय पर दी जाने वाली सर्वे रिपोर्ट भी यही कहती है। डॉक्टरों की मानें तो मां के शरीर से चिपककर बच्चा जल्दी स्वस्थ होता है। इसको ध्यान में रखते हुए अब जिले में भी केएमसीयू (कंगारू मदर केयर यूनिट) खोलने का फैसला लिया गया है। शासन से अनुमति मिलने के बाद में यहां जिला महिला अस्पताल में तेजी से काम शुरू भी हो गया है। इसके लिए स्टाफ को ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है।
दुनिया में जन्म लेने से पहले मां के गर्भ में बच्चा एकदम सुरक्षित होता है, लेकिन गर्भ से बाहर आते ही तमाम प्रकार की बैक्टीरिया उसे घेर लेते हैं। बाहरी दुनिया से लड़ने के लिए उसे मां-बाप के प्यार और संरक्षण की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है। बच्चे जब छोटे होते हैं तो उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता भी काफी कम होती है। ऐसे में कई बार बीमारियां उसे घेर लेती हैं, तब उसे बेहतर इलाज की जरूरत पड़ती है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिला महिला अस्पताल में नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) है, जहां पर अत्याधुनिक मशीनें लगी हुई है, जिसके द्वारा नवजात बच्चों को भर्ती करके इलाज किया जाता है। मशीनों के माध्यम से मां जैसा स्नेह देने की कोशिश भी की जाती है, लेकिन वैज्ञानिकों / डॉक्टरों की रिपोर्ट के मुताबिक मां से दूर होने पर और मशीनों के संपर्क में बच्चे के रोगमुक्त होने की संभावनाएं कम हो जाती है। ऐसे में डॉक्टर्स माता पिता को कंगारू मदर केयर तकनीक अपनाने की सलाह देते हैं। इसको ध्यान में रखते हुए बदायूं जिले में कंगारू मदर केयर यूनिट खोलने का फैसला किया गया। इसके लिए प्रशासन ने शासन से दिशा-निर्देश मांगे। शासन से अनुमति मिलने के बाद में जिला महिला अस्पताल में कंगारू मदर केयर यूनिट बनाने का तेजी से काम चल रहा है।
इससे बुखार की संभावनाएं होती हैं कम
कंगारू मदर केयर वह तकनीक है, जिसमें बच्चे को मां के सीने से चिपकाकर रखा जाता है, ताकि मां के शरीर की गर्माहट बच्चे तक ट्रांसफर हो पाए। मां का तापमान बच्चे को मिलने से बच्चे का तापमान स्थिर रहता है और उसे ठंडा बुखार होने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है।
मां संग रहने से बढ़ जाती है रोगों से लड़ने की क्षमता
-डॉक्टरों के मुताबिक मां के सीने के आसपास माइक्रोबायोम पाए जाते हैं। यह अच्छे बैक्टीरिया होते हैं। जब यह बैक्टीरिया मां से बच्चे में ट्रांसफर होता है, तो बच्चे के शरीर पर मौजूद खराब बैक्टीरिया के लिए एंटी बायोटिक का काम करता है। यह बच्चे के अंदर रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता का विकास करता है।
स्टाफ को दी जा चुकी है ट्रेनिंग
जिला महिला अस्पताल के लेबर रूम के स्टाफ को तथा उझानी सीएचसी के स्टाफ को केएमसी (कंगारू मदर केयर) की ट्रेनिंग दी गई है। पुरुष स्टाफ नर्स देवलाल ने केएमसी को देने की सही विधि सीखी है, साथ ही साथ स्वयं अनुभव भी किया।
जिला महिला अस्पताल के 100 शैय्या वार्ड में कंगारू मदर केयर यूनिट बनाया जा रहा है, इससे उन माता पिता को काफी सहूलियत होगी जिनके नवजातों को इसकी जरूरत है। स्टाफ को भी इसकी ट्रेनिंग दी जा चुकी हैं।
-निशा अनंत, सीडीओ