बदायूं। महिला अस्पताल के एसएनसीयू में दो माह में 32 बच्चों की मौत का मामला लखनऊ मुख्यालय तक पहुंच गया है। इसकी मंडलीय अधिकारियों के अलावा डीजी हेल्थ भी जांच कर चुके हैं, मगर सामने कुछ निकलकर नहीं आया, न ही इतने बच्चों की मौत होने का कारण पता चला, मगर अब सीडीओ निशा अनंत ने इसकी तह तक जाने के लिए नए सिरे से जांच शुरू कर दी है। उन्होंने कहा है कि ऐसा दोबारा न हो, इसके लिए ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं।
एसएनसीयू में पिछले दो माह के रिकॉर्ड के मुताबिक करीब 32 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि पिछले बीस दिन में 18 बच्चों की जान चली गई। इसकी मुख्य वजह संक्रमण बताई गई थी, जिससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया था। तब से लेकर प्रभारी सीएमओ डॉ. मंजीत सिंह, ज्वाइंट डायरेक्टर हेल्थ डॉ. हरीश चंद्रा और उनके बाद डीजी हेल्थ उमाकांत एसएनसीयू का निरीक्षण कर चुके हैं लेकिन अभी तक समस्या का हल नहीं हुआ है।
इधर, सीडीओ निशा अनंत ने एसएनसीयू में बच्चों की मौत के मामले की नए सिरे से जांच शुरू कर दी। उन्होंने प्रत्येक बच्चे की बीएचटी (बेड हेड टिकिट) की कॉपी मांगी है। इसके अलावा कुछ अन्य रिकॉर्ड भी तलब किए हैं।
तीसरे दिन भी नहीं बदली गईं केएमसी वार्ड की चादरें
-एक तरफ स्वास्थ्य विभाग संक्रमण फैलने से इंकार कर रहा है तो वहीं एसएनसीयू के केएमसी वार्ड में तीसरे दिन भी बेड की चादरें नहीं बदली जा रहीं हैं। बिछी हुईं चादरों पर नए मरीज को भी लिटा दिया जाता है। इससे संक्रमण सीधे एसएनसीयू में पहुंच रहा है।
एसएनसीयू में बच्चों की मौत कैसे हुई थी, उन्हें क्या बीमारी थी, बच्चों की मौत पर कैसे विराम लगाया जाए, उनका बेहतर इलाज कैसे हो, इस पर हम विचार कर रहे हैं। हर पहलू को गंभीरता से चेक किया जा रहा है, ताकि एसएनसीयू में दोबारा ऐसी स्थिति पैदा न हो, साथ ही बच्चों की मौत न हो।
निशा अनंत, सीडीओ