बदायूं। इंटर में फेल होने के बाद बुधवार को फिर से एडमिशन कराने को माता-पिता के पैर छूकर नीरज और उमेश निकले, लेकिन उनकी मौत की खबर आई तो परिजन बेसुध हो गए। दोनों दो-दो विषयों में फेल हो गए। पास के ही रहने वाले लोकेश ने दोनों को एडमिशन कराने का जिम्मा ले लिया तो तीनों ही एक बाइक से गए थे।
सहसवान कोतवाली क्षेत्र के गांव सुखर्रा के रहने वाले नीरज व उमेश का घर आमने-सामने था। पड़ोस में लोकेश रहता था। वह निजी स्कूल संचालित करता था। गांव के लोग उन्हें गुरुजी कहते थे। नीरज और उमेश कई दिनों से एडमिशन को लेकर लोकेश से अनुरोध कर रहे थे। बुधवार को उसने बिसौली क्षेत्र के एक इंटर कॉलेज में एडमिशन कराने की बात कही थी। सुबह करीब 10 बजे तीनों एक ही बाइक से गए थे। लोकेश ने दोनों का एडमिशन कराया और किसी काम से वह बिसौली गए। देर शाम तीनों एक ही बाइक से घर लौट रहे थे कि सहसवान बिसौली रोड पर सुल्तानपुर गांव के पास किसी अज्ञात वाहन ने बाइक को टक्कर मार दी।
चार भाइयों में तीसरे नंबर के थे उमेश और नीरज
उमेश और नीरज चार भाई थे। दोनों ही तीसरे नंबर के थे। दोनों की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। दोनों के पिता खेती किसानी करके परिवार को पालन पोषण कर रहे हैं।
दो भाइयों में था बड़ा लोकेश
लोकेश दो भाई थे, वह बड़ा था। उसने अपना स्कूल खोला और मेहनत करके आज परिवार का पालन पोषण करता था। उसकी मौत के बाद परिवार पर संकट आ गया है। पिता मेहनत मजदूरी करते हैं। छोटा भाई पिता के साथ ही उनका हाथ बंटाता था लेकिन परिवार चलाने में लोकेश की अहम भूमिका थी। लोकेश 22 साल था और आईटीआई करने के बाद बच्चों को पढ़ाने लगा।
हेलमेट होता तो शायद बच जाती जान
बाइक को लोकेश चला रहा था। उमेश और नीरज बैठे थे, लेकिन हेलमेट किसी ने नहीं पहना था। छोटी सी लापरवाही ने तीनों की जान ले ली। लोगों का यही कहना था कि कहीं हेलमेट होता तो शायद जान नहीं जाती।