फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

...रहम करो भगवान, मर जाएगा किसान

Sat, 04 Apr 2015 11:18 PM IST
badaun
विज्ञापन
विज्ञापन
शुक्रवार रात तेज हवा के साथ बारिश से पकी खड़ी गेहूं की फसलें गिरकर बिछ गईं। जिन खेतों में गेहूं की फसल कटी पड़ी थीं, उनके पूले उड़कर दूर-दूर छितर गए। इससे किसानों को भारी मशक्कत उठानी पड़ी। आलू की खोदाई समेत तैयार फसलों को अब खेत सूखने का इंतजार करना पड़ेगा। शुक्रवार की रात चली तेज हवा के साथ जिले के पश्चिमी इलाके में कुछ देर ओले भी पड़े। किसान मौसम का मिजाज देख कलेजा थामे बैठा भगवान को याद कर रहा है।
विज्ञापन

रबी के सीजन में गेहूं और आलू दो बड़े रकबे की फसलें हैं। सरसों, सौंफ, मटर आदि कम रकबे की फसलें तो पिछली बरसात में लगभग समाप्तप्राय: हो गई हैं। तेज हवा और बारिश के साथ जिले के पश्चिम क्षेत्र में ओले गिरने से आम के पेड़ों से बौर भी नष्ट हो गया है। जिले में रबी का रकबा 2,93,125 हेक्टेयर है। पिछले दिनों शुरू मार्च में खराब मौसम के कारण 17,590 हेक्टेयर रकबा की फसल ऐसी थी, जिसमें 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ। इसमें 16,000 हेक्टेयर से अधिक गेहूं की फसल ही है। बाकी में सरसों, मसूर और मटर की फसल है। गेेहूं प्रति हेक्टेयर 35 से 40 क्विंटल पैदावार होती है। प्रभावित हेक्टेयर में 17 से 20 क्विंटल तक की पैदावार का अनुमान है। इधर, रात की बारिश और तेज हवाओं से कुछ पेड़ भी गिरे हैं। कादरचौक क्षेत्र में बिजली लाइन पर पेड़ गिरने से पूरे क्षेत्र की बिजली ठप हो गई।
दहगवां। शुक्रवार की रात तेज हवा के साथ तेज बारिश ने खड़ी फसलों को बिछा दिया। कटे पड़े गेहूं की पूलियां दूर-दूर तक छितर गईं। अपनी फसलों की ये हालत देख किसान के दिल दहल गए। पहले ही इस क्षेत्र में खराब मौसम किसानों पर कहर ढा चुका है।
विज्ञापन

कादरचौक। हवा ने गेहूं, सरसों और सौंफ आदि की फसलों को बिछा दिया, वहीं आम के पेड़ों से बौर झड़ गया। आम के बागानों को काफी नुकसान पहुंचा है। क्षेत्र की बिजली लाइन पर शीशम का पेड़ गिर जाने के कारण पूरे इलाके की बिजली गुल हो गई है।

फसल देखने गया किसान बेहोश
दहगवां। किसानों की हजारों बीघा गेहूं की फसल खेतों में बिछकर नष्ट हो गई है। थाना क्षेत्र के ग्राम भीमपुर में पौपी किसान सुबह अपने खेत पर गया। फसल की बर्बादी देख उसके होश उड़ गए। वह गश खाकर खेत में ही औंधे मुंह गिर गया, जिसे देख आसपास के किसान एकत्र हो गए। लगभग दो घंटे बाद वह सामान्य हो सका।
इधर, भीमपुर गांव के किसानों ने हल्का लेखपाल पर आरोप लगाया है कि मुआवजा दर्शाने के नाम पर किसानों से सुविधा शुल्क की मांग कर रहा है। गांव वालों में लेखपाल के प्रति आक्रोश है। इस गांव में तेज बारिश और हवाओं से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। किसान त्राहि-त्राहि कर उठा है। यहां कुछ किसानों ने पेशगी पर लेकर गेहूं की फसल की थी। ऐसे किसान अपनी मेहनत और रकम ही गला बैठे हैं। गांव मे किसान निशोक, उदयवीर, विधवा मानकौर, मोहनलाल, चंद्रपाल,  गोपीराम, स्वागो देवी, पौपी, पोशाकी, थानसिंह, नरेश पाल सिंह, नारायन, भोजराज, जयसिंह, लटूरी, दिगंबर, ममता, जगदीश, रतनसिंह, सुम्मेरी, रामसिंह, ओमपाल, पोशाकी की फसलें पूरी तरह खराब हो गई हैं। इधर, किसान मुआवजा को शासन व प्रशासन का मुंह ताक रहे हैं।


लगातार बारिश और ओलावृष्टि से रबी की फसलों को बार-बार नुकसान पहुंचा है। एक सर्वे हो चुका है। किसान ढांढस रखें अगर उस सर्वे में उनका नाम नहीं आया है तो दूसरे सर्वें में वह लाभान्वित हो जाएंगे। कोई लेखपाल अगर उनकी फसल के बारे में रिपोर्ट नहीं देता है तो वे संबंधित एसडीएम से अपनी बात कह सकते हैं। किसानों को मुआवजा दिए जाने में पूरी पारदर्शिता रखी जाएगी। उनके प्रति शासन-प्रशासन की पूरी सहानुभति है।
- आरपी यादव, आपदा प्रभारी/ एडीएम वित्त

मुआवजे के लालच में हो रहा नुकसान
मुआवजे के लालच में किसानों को फायदे की जगह नुकसान उठाना पड़ रहा है। अधिकांशत: काश्तकारों ने फसल का सर्वे कराने के चक्कर में पककर तैयार हुई गेहूं की खड़ी फसल की कटाई कराने में देरी कर दी है। अब मौसम की बेवफाई की वजह से चाहकर भी वो कटाई नहीं कर पा रहे हैं। रोजाना हो रही बरसात और बादलों की गड़गड़ाहट से किसान की जान सूख रही है।
अतिवृष्टि और तेज हवा से बड़ी तादाद में गेहूं की फसल बिछ गई थी। अनुकूल मौसम नहीं मिलने से गेहूं का दाना भी कमजोर हो गया। शासन द्वारा मुआवजा देने की घोषणा से किसान को राहत तो महसूस हुई किंतु फसल के नुकसान का सर्वे कराने के चक्कर में कटाई लेट हो गई। किसानों का मानना है कि लेट होने से वैसे तो कोई नुकसान नहीं था, लेकिन मौसम की जो मार पड़ रही है उससे काफी नुकसान हो रहा है। जिन खेतों में पानी भर गया है, उन में फसल सड़ने लगी है। बरसात की वजह से कटाई संभव नहीं है। इस समय किसान को सबसे ज्यादा खतरा संभावित ओलावृष्टि से है, यदि दुर्भाग्य से ओले पड़ गए तो वे बर्बाद हो जाएंगे।

...आए थे हरभजन को ओटन लगे कपास
दातागंज। किसान को उम्मीद थी कि मुआवजा राशि से उसकी क्षतिपूर्ति हो जाएगी, लेकिन जो मुआवजा मिल रहा है वो नुकसान के हिसाब से ऊंट के मुंह में जीरा है। लघु काश्तकारों का मानना है कि सर्वे के चक्कर में पड़ने के बजाय अगर गेहूं उठा लेते तो ज्यादा अच्छे रहते।

...अभी 30 फीसदी गांवों में बंटा मुआवजा
दातागंज। अभी तक तहसील क्षेत्र के 30 प्रतिशत गांवों में मुआवजा बंटा है। तहसील क्षेत्र में कुल 501 राजस्व गांव हैं, जिनमें मात्र 157 गांवों में ही मुआवजा बांटा गया है। जिन गांवों में मुआवजा बंट चुका है, उनमें भी शिकायतों का दौर चल रहा है। अधिकांश किसान गड़बड़ी का आरोप लगा रहे हैं।
फसल के नुकसान के सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है। मुआवजे के चेक बन रहे हैं। अब तक 157 गांवों में छह हजार दो सौ काश्तकारों को एक सौ 32 लाख रुपये का मुआवजा मिल चुका है। बाकी काश्तकारों के चेक बनाए जा रहे हैं। मुआवजा देने में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है, जिनको नुकसान नहीं हुआ है। वहीं काश्तकार बवाल काट रहे हैं। -ओपी तिवारी,एसडीएम दातागंज
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें