ऐतिहासिक देवी मंदिर पर लगे मेले में भक्तों का रेला उमड़ा। भक्तों ने देवी मां को घंटा, चुनरी चढ़ाकर मनौतियां मांगी। चैत्र नवरात्र के समापन के बाद पूर्णिमा को श्रद्धालु यहां जात के लिए एकत्र होते हैं। सैकड़ों वर्षों से देवी के मंदिर पर मेला लगता आ रहा है। यहां सुदूर क्षेत्रों से लोग आते हैं। इस बार भी मेले में लोगों की भीड़ उमड़ी।
aनहीं लगने दिया लाउडस्पीकर
मेला में मनोरंजन के लिए झूले, नाटक मंचन समेत अन्य संसाधन लगाए जाते हैं। इस बार पुलिस ने लाउडस्पीकर लगने दिया। न ही नाटक कंपनी का आयोजन होने दिया। पुलिस के इस रवैए से आयोजकों में रोष है। लोगों का कहना है कि इससे दुकानदारों की बिक्री पर प्रभाव पड़ रहा है।
कन्या भोज कराकर मुंडन संस्कार कराए दूरदराज से आए श्रद्वालुओं ने कन्या भोज कराया। मुंडन संस्कार भी कराए। बच्चों ने झूला के साथ ही मिठाई, चाट का आनंद लिया। मीना बाजार में भी खूब भीड़ रही।
देवी मंदिर का इतिहास
ककोड़ा देवी मंदिर के बारे में बताया जाता है कि जब गंगा ककोड़ा गांव के पास से ही बहती थी, उस समय भी मंदिर पर दो मेले लगते थे। एक चैत्र नवरात्र से पूर्णिमा तक दूसरा कार्तिक पूर्णिमा पर, जिसमें कार्तिक पूर्णिमा का मेला मिनी कुंभ के नाम से जाना जाता है। जो गंगा तट पर लगता है। चैत्र पूर्णिमा का मेला मंदिर पर ही लगता चला आ रहा है। किवदंती है कि नवाब अब्दुल्ला ने देवी की सेवा की, जिससे उनका कुष्ठ रोग ठीक हो गया था, तब नवाब ने ही मेला लगवाया था। मुगल शासन से लेकर आज तक मेला लगता आ रहा है। हालांकि कार्तिक पूर्णिमा के मेला को अब जिला पंचायत लगवाती है। चैत्र पूर्णिमा का मेला ग्राम पंचायत के सहयोग से मंदिर समिति लगवाती आ रही है।