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हापुड़ थार हादसा: चंद सेकंडों में चली गई बदायूं के चार युवकों की जान, तेज रफ्तार बनी काल

Tue, 01 Sep 2026 03:53 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं

सार

हापुड़ में गंगा एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे ने बदायूं के चार परिवारों की खुशियां छीन ली। ट्रक से टकराने के बाद थार कार पलट गई। हादसे में थार सवार चार युवकों की मौत हो गई। इसकी खबर मिलते ही उनके परिवारों में कोहराम मच गया। 
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मृतकों के परिवारों में मचा कोहराम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हापुड़ में गंगा एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार थार के ट्रक से टकराने के बाद हुए हादसे में बदायूं जिले के चार युवकों की मौत से मेवली सहित तीन गांव शोक में डूब गए। उघैती के गांव मेवली के दो भाइयों सुखवेंद्र (25) और जसवंत (20) की जान जाने से गमगीन लोगों के घरों में चूल्हे तक नहीं जले। 

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दोनों भाई हादसे में मरे जोगेंद्र की दिल्ली के अलीपुर में पैकेजिंग मेटेरियल (पन्नी) बनाने वाली फैक्टरी में काम करते थे। हादसे में जोगेंद्र और उसके ममेरे भाई रवि की भी मौत हो गई। जोगेंद्र इन तीनों युवकों के साथ अपने यहां काम करने वाले चचेरे भाई विष्णु और कुंवरपाल को भी साथ लेकर आया था। विष्णु हादसे में मामूली रूप से घायल हुआ तो कुंवरपाल किसी कारण दिल्ली न लौटने से हादसे से बच गया। 

तीन साल पहले पिता को पैरालाइसिस होने के बाद दोनों सगे भाइयों के कंधों पर परिवार की पूरी जिम्मेदारी आ गई थी। पिता के इलाज का खर्च, परिवार के पालन पोषण की जिम्मेदारी अच्छे से निभाने के लिए सुखवेंद्र के साथ छोटे भाई जसवंत ने भी नौकरी करना शुरू कर दी थी। 

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गांव में नहीं जले चूल्हे 
हसमुख मिजाज दोनों भाइयों को याद कर उनके परिवार के लोग ही नहीं, बल्कि दोस्त भी गमजदा हैं। गांव में चूल्हे तक नहीं जले। सुबह से शाम तक ग्रामीण पीड़ित परिवार का दुख बांटने के लिए खड़े रहे। पड़ोसी  ग्रामीणों ने बताया कि उघैती क्षेत्र में कामकाज ठीक से न मिलने पर तीन साल पहले ही दोनों भाइयों ने दिल्ली जाकर नौकरी करना शुरू कर दिया था। अब वे जोगेंद्र के यहां काम कर रहे थे। 

उनके साथ काम करने वाले कुंवरपाल ने बताया कि दोनों भाई बहन आरती से राखी बंधवाने के लिए रक्षाबंधन से एक दिन पहले आए थे। रविवार रात करीब नौ बजे वे घर से दिल्ली में नौकरी पर वापस जाने के लिए रवाना हुए। 

कुंवरपाल बच गए
सुखवेंद्र और जसवंत के साथ कुंवरपाल को भी जाना था, लेकिन परिवार में किसी काम की वजह से कुंवरपाल रुक गए। हालांकि, कुंवरपाल ने अपनी बाइक से उन दोनों भाइयों को उघैती तक पहुंचा दिया था। वहां से उन्हें थार गाड़ी मिली। इसमें फैक्टरी के अन्य साथी थे। रात एक बजे कुंवरपाल के मोबाइल फोन पर कॉल आई कि थार गाड़ी हादसाग्रस्त हो गई है और उसमें सवार सुखवेंद्र, जसवंत व अन्य दो युवकों की मौत हो गई है। एक युवक घायल है।

पिता गमजदा, बेटों की मौत पर कुछ नहीं बोल सके
पिता होतीलाल को जब से दोनों बेटों की मौत की खबर मिली तब से वह इतने गमजदा हो गए कि उसके बाद से कुछ बोल नहीं पा रहे हैं। आंखों से आंसू बह रहे हैं। उनका दुख बांटने के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा। वहीं, मां पूनम का कलेजा फट गया। दोनों बेटों की मौत ने उनकी सुध-बुध खो दी है। वह किसी से बात नहीं कर रहीं। गमजदा होकर बैठी रहीं। 

जोगेंद्र ने दिल्ली में जमा लिया था कारोबार
दुर्घटनाग्रस्त हुई थार गाड़ी जान गंवाने वाले जोगेंद्र उर्फ कल्लू की थी। जोगेंद्र ने दिल्ली में रहकर पॉलिथीन का अपना कारोबार जमा लिया था। तीन महीने पहले उन्होंने थार गाड़ी खरीदी थी। गांव पालपुर निवासी जोगेंद्र (26) रविवार रात हंसी-खुशी दिल्ली के लिए निकले थे, लेकिन हापुड़ में हुए सड़क हादसे में उनकी भी मौत हो गई। बेटे की मौत की खबर से अनजान हृदय रोगी उनकी मां माया देवी को परिजन काफी देर तक घटना बताने की हिम्मत नहीं जुटा सके।

सोमवार शाम को जब जोगेंद्र का शव गांव पहुंचा तो पूरा गांव गम में डूब गया। गांव के चरण सिंह ने बताया कि जोगेंद्र रविवार रात करीब नौ बजे गांव के ही विष्णु पुत्र गिरिराज को साथ लेकर अपनी थार गाड़ी से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। रास्ते में उघैती से मेवली निवासी सुखवेंद्र और जसवंत सिंह और राजपुर से पुरदलपुर निवासी अपने ममेरे भाई रवि पुत्र करन सिंह को भी गाड़ी में बैठा लिया। रात करीब 11:45 बजे हापुड़ के पास गंगा एक्सप्रेसवे पर थार ट्रक से टकराने के बाद पलट गई। 

हादसे में जोगेंद्र समेत चार लोगों की मौत हो गई, जबकि विष्णु घायल हो गए। करीब दस वर्षों से दिल्ली में रहकर पॉलिथीन का कारोबार कर रहे जोगेंद्र ने मेहनत से अपनी पहचान बनाई थी। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के बाद उन्होंने थार गाड़ी खरीदी थी। रक्षाबंधन पर बहनों और परिवार के बीच खुशियां बांटने वह गांव आए तो साथ में काम करने वालों को भी ले आए थे। 
 
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तीन साल पहले हुई थी सुखवेंद्र की शादी, डेढ़ साल की है बेटी
सुखवेंद्र की शादी करीब तीन साल पहले धर्मवती के साथ हुई थी। धर्मवती को परिवार के लोग दामिनी भी कहते हैं। सुखवेंद्र की डेढ़ साल की बेटी है। जबकि जसवंत की शादी नहीं हुई थी। परिजनों ने बताया कि सुखवेंद्र बीए पास थे। जसवंत ने हाईस्कूल पास करने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ते देख पढ़ाई छोड़कर बड़े भाई सुखवेंद्र के साथ नौकरी शुरू कर दी थी।
 
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