गांव में नहीं जले चूल्हे
हसमुख मिजाज दोनों भाइयों को याद कर उनके परिवार के लोग ही नहीं, बल्कि दोस्त भी गमजदा हैं। गांव में चूल्हे तक नहीं जले। सुबह से शाम तक ग्रामीण पीड़ित परिवार का दुख बांटने के लिए खड़े रहे। पड़ोसी ग्रामीणों ने बताया कि उघैती क्षेत्र में कामकाज ठीक से न मिलने पर तीन साल पहले ही दोनों भाइयों ने दिल्ली जाकर नौकरी करना शुरू कर दिया था। अब वे जोगेंद्र के यहां काम कर रहे थे।
उनके साथ काम करने वाले कुंवरपाल ने बताया कि दोनों भाई बहन आरती से राखी बंधवाने के लिए रक्षाबंधन से एक दिन पहले आए थे। रविवार रात करीब नौ बजे वे घर से दिल्ली में नौकरी पर वापस जाने के लिए रवाना हुए।
कुंवरपाल बच गए
सुखवेंद्र और जसवंत के साथ कुंवरपाल को भी जाना था, लेकिन परिवार में किसी काम की वजह से कुंवरपाल रुक गए। हालांकि, कुंवरपाल ने अपनी बाइक से उन दोनों भाइयों को उघैती तक पहुंचा दिया था। वहां से उन्हें थार गाड़ी मिली। इसमें फैक्टरी के अन्य साथी थे। रात एक बजे कुंवरपाल के मोबाइल फोन पर कॉल आई कि थार गाड़ी हादसाग्रस्त हो गई है और उसमें सवार सुखवेंद्र, जसवंत व अन्य दो युवकों की मौत हो गई है। एक युवक घायल है।
पिता गमजदा, बेटों की मौत पर कुछ नहीं बोल सके
पिता होतीलाल को जब से दोनों बेटों की मौत की खबर मिली तब से वह इतने गमजदा हो गए कि उसके बाद से कुछ बोल नहीं पा रहे हैं। आंखों से आंसू बह रहे हैं। उनका दुख बांटने के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा। वहीं, मां पूनम का कलेजा फट गया। दोनों बेटों की मौत ने उनकी सुध-बुध खो दी है। वह किसी से बात नहीं कर रहीं। गमजदा होकर बैठी रहीं।
जोगेंद्र ने दिल्ली में जमा लिया था कारोबार
दुर्घटनाग्रस्त हुई थार गाड़ी जान गंवाने वाले जोगेंद्र उर्फ कल्लू की थी। जोगेंद्र ने दिल्ली में रहकर पॉलिथीन का अपना कारोबार जमा लिया था। तीन महीने पहले उन्होंने थार गाड़ी खरीदी थी। गांव पालपुर निवासी जोगेंद्र (26) रविवार रात हंसी-खुशी दिल्ली के लिए निकले थे, लेकिन हापुड़ में हुए सड़क हादसे में उनकी भी मौत हो गई। बेटे की मौत की खबर से अनजान हृदय रोगी उनकी मां माया देवी को परिजन काफी देर तक घटना बताने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
सोमवार शाम को जब जोगेंद्र का शव गांव पहुंचा तो पूरा गांव गम में डूब गया। गांव के चरण सिंह ने बताया कि जोगेंद्र रविवार रात करीब नौ बजे गांव के ही विष्णु पुत्र गिरिराज को साथ लेकर अपनी थार गाड़ी से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। रास्ते में उघैती से मेवली निवासी सुखवेंद्र और जसवंत सिंह और राजपुर से पुरदलपुर निवासी अपने ममेरे भाई रवि पुत्र करन सिंह को भी गाड़ी में बैठा लिया। रात करीब 11:45 बजे हापुड़ के पास गंगा एक्सप्रेसवे पर थार ट्रक से टकराने के बाद पलट गई।
हादसे में जोगेंद्र समेत चार लोगों की मौत हो गई, जबकि विष्णु घायल हो गए। करीब दस वर्षों से दिल्ली में रहकर पॉलिथीन का कारोबार कर रहे जोगेंद्र ने मेहनत से अपनी पहचान बनाई थी। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के बाद उन्होंने थार गाड़ी खरीदी थी। रक्षाबंधन पर बहनों और परिवार के बीच खुशियां बांटने वह गांव आए तो साथ में काम करने वालों को भी ले आए थे।