जीवन के लिए जल अनमोल है, लेकिन जल संरक्षण और जल की शुद्धता बरकरार रखने के लिए कारगर प्रयास नहीं हो रहे हैं। चुनावों में भी यह गंभीर मसला कभी मुद्दा नहीं बनता। बदायूं जिला भी पानी की किल्लत और जल प्रदूषण से जूझ रहा है। जल स्रोतों के अधिक दोहन ने पानी की बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। बदायूं के 15 में पांच ब्लाक जल दोहन के कारण डार्क जोन में पहुंच गए हैं। इतना ही नहीं जीवन रेखा समझी जाने वाली गंगा, रामगंगा, महावा, सोत, अरिल, भैंसोर, असवार नदियों में सिर्फ गंगा और रामगंगा ही अस्तित्व में हैं। बाकी नदियां समाप्त हो चुकी हैं या समाप्त होने के कगार पर हैं।
भूगर्भ के तीसरे और सबसे निचले स्तर तक लोग पानी का दोहन करने में लगे हैं, लेकिन वॉटर रीचार्जिंग के लिए कोई उपाय नहीं हो रहे। जिले में वाटर रिचार्ज के लिए मनरेगा से 885 तालाब बनाए गए। इनमें पानी भर कर बजट बर्बाद किया गया। फायदा कोई नहीं हुआ। जल प्रदूषण भी तेजी से बढ़ रहा है। नगर पालिका, नगर पंचायतें और कुछ बड़े गांवों में 550 से 600 फिट गहराई का पानी ओवरहैड टैंक में स्टोर कर सप्लाई किया जा रहा है। लीकेज पाइप लाइनों की वजह से यहां भी घरों में दूषित जल पहुंच रहा है।
जानें पानी की दुनिया के बारे में
-धरती पर पानी की स्थिति- 1.4 अरब घन मीटर
-जो पूरी धरती पर फैलाया जाए तो तीन किमी की परत बना सकता है।
-95 प्रतिशत पानी सागरों में है, जो लवणीय होने के कारण पीने योग्य नहीं है।
-चार प्रतिशत पानी ध्रुवीय स्थलों पर बर्फ के रूप में जमा हुआ है।
-एक प्रतिशत ही पानी ऐसा है जो पीने योग्य है और नदी-झीलों के अलावा भूगर्भ में है।
पानी में वह तत्व जो रोग पैदा करते हैं
तत्व रोग
सोडियम ब्लड प्रेशर
कैल्शियम किडनी स्टोन
मैग्रेशिया किडनी स्टोन
लीड मानसिक बीमारी
मरकरी दर्द
नाइट्रेट पेट रोग
वैक्टीरिया त्वचा संबंधी रोग
फेरागन फीवर
फ्लोराइड बोन वीक
आर्सेनिक विषाक्त
पिछले एक सर्वे की रिपोर्ट में दूषित पानी की मात्रा
बदायूं- 62 प्रतिशत
पीलीभीत- 68 प्रतिशत
शाहजहांपुर- 32 प्रतिशत
शरीर में पानी की मात्रा
मस्तिष्क 75 प्रतिशत
दिल 75 प्रतिशत
फेफड़े 86 प्रतिशत
लीवर 96 प्रतिशत
किडनी 75 प्रतिशत
ब्लड 83 प्रतिशत
वर्जन-
शहरी इलाकों में पांच किमी तक के दायरे में भू-गर्भ जल भी दूषित हो गया है। गांवों में जरूर कुछ गनीमत है। शहरी इलाकों में इंडिया मार्का हैंडपंप 140 फीट गहराई में लगाए जाते हैं। पानी में दूषित तत्व यहां तक पहुंच चुके हैं। स्थिति लगातार गंभीर हो रही है।
-रामदास सिंह, वाटर एक्सपर्ट