ये ट्रेनें हुईं प्रभावित
रामनगर-बांद्रा सुपरफास्ट एक्सप्रेस को बदायूं स्टेशन पर रोका गया। उझानी स्टेशन पर पहले से मौजूद दो मालगाड़ियों को वहीं रोक दिया गया। कासगंज और बरेली की ओर से आने-जाने वाली दो अन्य मालगाड़ियों को रास्ते में ही रोकने के निर्देश दिए गए। आगरा फोर्ट–रामनगर एक्सप्रेस, जो रात करीब दो बजे उझानी पहुंचती है, उसे भी कासगंज स्टेशन पर रोकने की घोषणा की गई।
घना कोहरा बना बाधा, डेढ़ घंटे बाद शुरू हो सका रेस्क्यू
हादसे के बाद घने कोहरे ने राहत कार्य को बेहद कठिन बना दिया। दृश्यता कम होने के कारण पुलिस और रेलवे स्टाफ को सड़क मार्ग से मौके तक पहुंचने में काफी दिक्कत हुई। बदायूं आरपीएफ इंस्पेक्टर रामप्रताप सिंह ने बताया कि कोहरे की वजह से करीब डेढ़ घंटे बाद जाकर राहत एवं तकनीकी कार्य प्रभावी रूप से शुरू हो सका। इसके बाद जीआरपी, आरपीएफ और रेलवे टीम ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला।
उझानी रेलवे स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक अनुराग सिंह ने बताया कि मालगाड़ी के इंजन के आगे अचानक नीलगाय आ गई थी, जिससे यह हादसा हुआ। एक डिब्बा पटरी से उतरा है। किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। पटरी से उतरे डिब्बे को हटाने के लिए कासगंज स्टेशन से क्रेन मौके के लिए रवाना कर दी गई है। उझानी से एक इंजन भी भेजा गया है ताकि डिब्बे को सुरक्षित तरीके से हटाकर ट्रैक बहाल किया जा सके। रेलवे के इंजीनियर ट्रैक की जांच में जुटे हैं।
पुरानी रेल दुर्घटना ने ताजा कर दी भयावह यादें
इस हादसे ने क्षेत्र के लोगों को करीब डेढ़ दशक पहले कछला ब्रिज और मानपुर नगरिया स्टेशन के बीच हुई उस भीषण रेल दुर्घटना की याद दिला दी, जब एक एक्सप्रेस ट्रेन का इंजन पटरी से उतरकर बाढ़ के पानी में जा गिरा था। उस समय ट्रेन के पायलट की मौत हो गई थी। इंजन निकालने के लिए एसडीआरएफ व पीएसी के गोताखोरों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी थी। अंततः इंजन नहीं निकल सका और रेलवे को उसे वहीं जमीन में दफन करना पड़ा था।