साहूकारा में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का समापन
मोहल्ला साहूकारा में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा के अंतिम दिन कथा व्यास कार्तिकेय कृष्ण पाराशरी ने कहा कि आत्मा अजर है। आत्मा कभी कष्टों की पीड़ा नहीं सहती। पीड़ा शरीर सहता है। आत्मा को शस्त्र काट नहीं सकता, पानी भीगो नहीं सकता और आग जला नहीं सकता है। सुदामा चरित्र प्रसंग में कहा कि प्रेम ही जगत का सार है। सुख और दुख दोनों में भगवान से प्रेम करना चाहिए। जीव के जीवन में जब दुख आता है तो समझ लो कि उस पर भगवान की कृपा होने वाली है। गरीब सुदामा ब्राह्मण पर यदि दुख नहीं आते तो उनको परमात्मा का दर्शन नहीं होता, भगवान की उन पर कृपा नहीं होती। एक प्रसंग से स्पष्ट किया कि यह पूरा संसार स्वार्थी है। यहां सभी नाते-रिश्ते स्वार्थ के लिए बनते और बिगड़ते हैं। सच्चा रिश्ता तो भक्त और भगवान का है जो कभी टूटता नहीं है। भगवान का रिश्ता निर्मल, निष्काम और पवित्र है, इसलिए जीव को अपना रिश्ता भगवान से जोड़ना चाहिए। कथा व्यास ने परीक्षित मोक्ष की कथा का भी सुंदर वर्णन किया। कलयुग में होने वाले प्रभु के होने वाले अवतार के बारे में भी बताया। नरेंद्र कुमार बबेजा मुख्य यजमान रहे। कामेश पाठक, शारदा बबेजा, उमाशंकर, राही, अतुल पांडेय आदि का सहयोग रहा।
रासमंडली ने किया कृष्णजन्म का मंचन
जरीफनगर। कस्बा क्षेत्र के गांव मालपुर ततेरा में रासलीला का विधिवत शुभारंभ महंत राम रतन दास ने किया। मथुरा-वृंदावन से आई रासमंडली ने कृष्णजन्म का मंचन किया, जिसे देख श्रद्धालु भावविभोर हो गए। आश्रम पर हर वर्ष स्थानीय श्रद्धालुओं की ओर से रासलीला का आयोजन किया जाता है। हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की जैसे गीतों और भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति रस में डूबे श्रद्धालुओं ने कृष्ण जन्मोत्सव पूरे गांव में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया।