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भुगतान की देरी से हो रहा किसानों का गन्ना से मोह भंग

Fri, 08 Jul 2016 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
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किसानों का करोड़ो रुपए दबाकर बैठे हैं सुगर मिल - फोटो : Getty
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शासन के तमाम प्रयासों के बावजूद भी नहीं बढ़ा गन्ना रकबा 
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पांच फीसदी बढ़ाने के थे निर्देश, बीते वर्ष के बराबर ही रहा 
गन्ना मूल्यों के न बढ़ाए जाने और गन्ना मूल्यों का समय से भुगतान न होने से गन्ना किसानों का मोह भंग होने लगा है। इस बार शासन से मिले लक्ष्य के अनुरूप रकबे में गन्ने की बुवाई नहीं हो सकी। ऐसा इसलिए भी है कि जिले के गन्ना किसानों (गुन्नौर) तहसील को जोड़कर चीनी मिलों पर 71 करोड़ तीन लाख रुपये के करीब किसानों का बकाया है। इससे किसान गन्ने की फसल बोने से बचने लगा है। 
चीनी उद्योग को तमाम रियायतें देने के बावजूद गन्ना किसानों को उनके गन्ना का मूल्य भुगतान समय से प्राप्त नहीं हो सका। साथ ही शासन की ओर से तीन सालों से गन्ना मूल्यों को भी नहीं बढ़ाया गया। इससे किसानों का गन्ने से मोहभंग होने लगा है। इसकी बानगी इस वर्ष गन्ना रकबे के सर्वे में देखने को मिल गई। शासन की ओर से तमाम योजनाओं का लाभ दिए जाने, बीज, खाद आदि में छूट दिए जाने के बावजूद किसानों ने गन्ने की पैदावार नहीं बढ़ाई। इस वजह से गन्ना रकबा बीते वर्ष के बराबर ही रहा। 
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गन्ना पेराई सत्र 2015-16 में गन्ना रकबा 20535 हेक्टेयर था, जबकि पेराई सत्र 2016-17 के लिए हुए सर्वे में भी गन्ना रकबा 20600 के करीब है। ऐसा तब हुआ जब शासन ने पांच फीसदी रकबा बढ़ाने का लक्ष्य दिया था, जबकि स्थानीय स्तर पर गन्ना रकबा 20 फीसदी बढ़ाने का दंभ भरा गया था। सर्वे में सारे दावों की पोल खुल गई और रकबे में लक्ष्य की पूर्ति भी नहीं हो सकी। इससे गन्ना किसानों का इस फसल से मोहभंग होने के साथ ही मिल प्रशासन और गन्ना विभाग के अधिकारियों से भरोसा कम हुआ है। 
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गन्ना रकबे के सर्वे का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अब तक करीब 20600 हेक्टेयर के करीब गन्ना रकबे की गणना की जा चुकी है। शासन से पांच फीसदी गन्ना रकबा बढ़ाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका, लेकिन बीते वष की तुलना में रकबा बढ़ा जरूर है।  
-डीके सैनी, जिला गन्ना अधिकारी 
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