कादरचौक। रुहेलखंड के मिनी कुंभ के नाम से प्रसिद्ध मेला ककोड़ा का आयोजन इस बार नहीं हो रहा है। मेला ककोड़ा के करीब तीन सौ साल के इतिहास में यह पहली बार होगा, जब कार्तिक माह में भी गंगा की कटरी वीरान है। मेला का आयोजन न होने से आसपास के ग्रामीणों के साथ साधु-संत, श्रद्धालु और व्यापारी भी मायूस हैं। सोमवार को मुख्य स्नान पर्व है। इससे पहले गंगा तट पर कोई रौनक नजर नहीं आ रही। वहीं मुख्य स्नान के दिन गंगा तट पर भीड़ न हो इसके लिए यहां पुलिस की सात टीमों को लगाया गया है।
देवोत्थान एकादशी से हर वर्ष मेला ककोड़ा में साधु-संतों के साथ श्रद्धालुओं के परिवार गंगा किनारे कल्पवास करने के लिए पहुंचने लगते थे। कार्तिक पूर्णिमा के बाद इनकी वापसी होती थी। करीब एक महीने पहले ही जिला पंचायत की आर से गंगा की कटरी में मेलार्थियों के लिए सुविधाएं विकसित करने का काम शुरू हो जाता था। अस्थाई सड़कें, टेंट, पीने के पानी की व्यवस्था आदि जिला पंचायत करती थी। इस दौरान सैकड़ों मजदूरों को काम मिलता था। मिली कुंभ मेला ककोड़ा में खेल-तमाशे, ठेला-खोमचा के साथ छोटी-बड़ी दुकानें भी लगती थीं। करोड़ों का कारोबार मेला ककोड़ा में होता था। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते मेला के आयोजन को अनुमति न होने के कारण गंगा तट पर पुलिस और प्रशासन का पहरा रहेगा। पुलिस की सात टीमें गंगा तट पर पहुंचने वाले लोगों को रास्ते में रोकने का काम करेंगी। क्योंकि इस बार कोरोना संक्रमण के चलते मेला के आयोजन की शासन ने अनुमति नहीं दी है। ऐसे में गंगा के तटवर्ती गांवों के लोगों के अलावा साधु-संतों, श्रद्धालुओं में मायूसी है। ककोड़ा में गंगा तट तक पहुंचने के लिए कोई सड़क भी नहीं है। आस-पास के खेतों में फसलें खड़ी हैं। गंगा के तट पर कटरी में जहां तंबुुओं का शहर बसता था वहां इस बार सन्नाटा है। सोमवार को गुरु पूर्णिमा के मद्देनजर गंगा तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ न जुटे इसके लिए पुलिस-प्रशासन ने तैयारी कर ली है। हालांकि, जिला पंचायत की ओर से सोमवार को गंगा तट पर झंडी स्थापना और गंगा पूजन की औपचारिकता निभाई जाएगी।
जिला पंचायत की ओर से आज निभाई जाएगी, झंडी और गंगा पूजन परंपरा
- जिला पंचायत की ओर से सोमवार को ककोड़ा गंगा घाट पर झंडी स्थापना और गंगा पूजन के कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। जिला पंचायत अध्यक्ष प्रीति सागर, एएमए सत्यपाल, जिला पंचायत सदस्य धीरज सक्सेना के अलावा गंगा पूजन के कार्यक्रम में विधायक धर्मेंद्र शाक्य और पूर्व मंत्री भगवान सिंह शाक्य के पहुंचने की भी संभावना है। एएमए सत्यपाल ने बताया कि मेला के आयोजन की शासन से अनुमति न मिलने के चलते सोमवार को झंडी स्थापना और गंगा पूजन की परंपरा को निभाया जाएगा। जिला पंचायत के अधिकारी और जनप्रतिनिधि सुबह 11 बजे बदायूं से ककोड़ा के लिए रवाना होंगे। इसके बाद वहां ककोड़ा देवी मंदिर पर पूजन के बाद गंगा तट पर पूजन किया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारी जिला पंचायत विनोद कुमार यादव ने बताया कि गंगा पूजन और झंडी स्थापना की परंपरा को नहीं टूटने दिया जाएगा।
एसडीएम ने किया ककोड़ा गंगा तट का निरीक्षण
- एसडीएम सदर किशोर गुप्ता ने रविवार को ककोड़ा गंगा तट पर पहुंच कर यहां स्थिति का जायजा लिया। गंगा के जल स्तर को देखा और अधीनस्थों को निर्देश दिए कि कार्तिक पूर्णिमा के मुख्य स्नान पर्व पर गंगा तट पर भीड़ जमा न हो पाए। एसओ प्रयागराज मिश्रा ने बताया कि कोरोना गाइड लाइन को ध्यान में रखते हुए गंगा तट पर भीड़ रोकने के लिए सात टीमों को लगाया गया है। पड़ोसी जनपद कासगंज के थाना सिकंदरपुर वैश्य को भी इस संबंध में सूचित कर दिया गया है।
शासन से मेला के आयोजन की अनुमति नहीं मिली है। सोमवार को कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर जिला पंचायत की ओर से गंगा तट पर झंडी और पूजन की परंपरा निभाई जाएगी। जिला पंचायत अध्यक्ष समेत जिला पंचायत के नामित अधिकारी और कुछ जनप्रतिनिधि ककोड़ा देवी मंदिर पर पूजन और गंगा तट पर झंडी स्थापना के बाद गंगा पूजन में हिस्सा लेंगे।
- सत्यपाल, एएमए जिला पंचायत
बोले साधु संत-
यह पहली बार है कि मेला ककोड़ा का आयोजन नहीं हो रहा। गंगा तट पर कार्तिक माह में कल्पवास करने वाले साधु-संतों के साथ श्रद्धालुओं और गंगा के तटवर्ती गांवों में भी मायूसी है।
- महंत धर्म गिरि, ककोड़ा देवी मंदिर
कार्तिक माह में सप्तमी से पूर्णमासी तक कई स्नान पर्व होते हैं। इन स्नान पर्वों पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। शासन प्रशासन को साधु-संतों के कल्पवास की व्यवस्था करनी चाहिए थी।
- महंत परमात्मादास, ब्रह्मदेव आश्रम पापड़