उसहैत। क्षेत्र के गांव असमया रफतपुर में अभी भी कटान जारी है। इससे ग्रामीण बेहद चिंतित है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी फसल तो पहले ही गंगा में समा चुकी है। अब उनके पास घर ही बचा है। उसके आसपास की जमीन जिस तेजी से कट रही है। अगर ऐसे ही कटान होता रहा है, तो घर गंगा में समा सकते हैं। ऐसे में पुरुषों के साथ-साथ परेशान महिलाएं भी रात जागकर काट रही है।
जनपद में इस बार गंगा में जलस्तर में अचानक हुए परिवर्तन ने गंगा किनारे बसे ग्रामीणों की नींद को उड़ा दिया है। सबसे ज्यादा हालात उसहैत के गांव असमया रफतपुर के खराब है। यहां पर गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर का असर साफ देखने के लिए मिल रहा है। अभी तक कच्चे और पक्के नौ मकान गंगा में समा चुके हैं। बाढ़ का दंश झेल रहे ग्रामीणों के लिए प्रशासन स्तर से इनको लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। बस उन्हें अभी अस्थायी रूप से रहने के लिए प्राथमिक स्कूल को खुलवा दिया है, जहां पर इन ग्रामीणों के सामान को रखवा दिया है, लेकिन इनको बसाने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की है। हालत ये है गांव के पुरुषों के साथ महिलाएं भी रात जागकर काट रही हैं। इसकी वजह है कि गांव में अभी तेजी से कटान हो रही है, जो ग्रामीणों की चिंता को बढ़ाए हुए है। इधर, तहसीलदार वीरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि जिन लोगों के मकान गंगा में समा चुके हैं, उनको जिला प्रशासन की तरफ की मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।