गंगा घाट पर तड़के से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। दोपहर तक स्नान का दौर चला, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या में कमी नजर नहीं आई। श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाने के बाद पितरों को जलदान किया। ज्यादातर लोगों ने घाट पर पितरों का श्राद्ध कराया। ब्राह्मणों की मानें तो अमावस्या वाले दिन गंगाघाट पर ज्ञात और अज्ञात पितरों का श्राद्घ कराने का विशेष पुण्य अर्जित होता है। घाट पर पूजा-अर्चना भी की गई।
गंगाघाट के आसपास आश्रमों में भी धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। संत-महात्माओं की मौजूदगी में संकीर्तन का दौर भी चला। घाट पर ही लगे अमावस्या मेला में हजारों की संख्या में भीड़ रही। महिलाओं ने घरेलू सामान की खरीददारी भी की और बच्चों ने मनोरंजन के संसाधनों का लुत्फ उठाया। भीड़भाड अधिक होने की वजह से श्रद्घालुओं को असुविधा का सामना जरुर करना पड़ा लेकिन पुलिस और नगर पंचायत प्रशासन ने पुलों के आसपास का इलाका नो एंट्री जोन में शामिल हर स्नानार्थियों को पहुंचने नहीं दिया। बता दें कि पितृपक्ष पूर्णिमा पर हाथरस की दो युवतियों समेत तीन लोग डुबकी लगाते वक्त हादसे का शिकार हो गए थे।
चौकी के आसपास रहा जाम का माहौल
उझानी। कछला पुलिस चौकी के आसपास प्राइवेट वाहनों को खड़े कर दिए जाने से सुबह मसे ही जाम का माहौल नजर आने लगा। पुल पर भी काफी देर तक वाहन फंसे रहे। श्रद्घालुओं को सर्वाधिक दिक्कत कछला चौराहे से चौकी के पास गंगाघाट मोड़ तक हुई। पुलिस को भी आवागमन सुचारू कराने में मशक्कत का सामना करना पड़ा।