बदायूं। शिक्षा विभाग और माफिया की सांठगांठ की वजह से जिले के परिषदीय स्कूल के बच्चे आज भी खेल प्रतियोगिताओं से वंचित हैं। खेल माफिया द्वारा स्कूलों में घटिया क्वालिटी का सामान वितरित करा दिया गया तो उसके भुगतान पर तत्कालीन डीएम ने रोक लगा दी थी। ऐसे में कुछ स्कूलों में खेल का सामान पहुंचा और कुछ में नहीं, लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि फिर भी विभाग कागजों में तमाम प्रतियोगिताएं करा रहा है, जबकि धरातल पर हकीकत कुछ अलग ही नजर आती है।
परिषदीय स्कूलों के बच्चों को खेलकूद में बढ़ावा देने के उद्देश्य से शासन ने सभी विद्यालयों को पिछले साल धनराशि आवंटित की थी। इसमें प्रत्येक उच्च प्राथमिक विद्यालय को दस हजार और प्राथमिक विद्यालयों को पांच हजार रुपये खेल सामान खरीदने के दिए गए। इस तरह नब्बे लाख 10 हजार रुपये प्राथमिक विद्यालयों को तथा 65 लाख 60 हजार रुपये उच्च प्राथमिक विद्यालयों को दे दिए गए। इसकी जानकारी जब खेल माफिया को हुई, तो उन्होंने अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक से सेटिंग कर ली और उच्च व प्राथमिक विद्यालयों में खेल किट मुहैया करना शुरू कर दिया। इन खेल किटों में जो सामान था, उसकी क्वालिटी बेहद घटिया थी, जिसके कारण कुछ विद्यालयों के शिक्षकों ने इसका विरोध किया। इसके बाद उन्होंने जनप्रतिनिधियों से दबाव डलवाना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से कुछ विद्यालयों का स्टाफ खामोश हो गया, लेकिन फिर भी इसकी शिकायत तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह तक पहुंच गई। उन्होंने इसकी जांच कराने के लिए कमेटी गठित कर दी, साथ ही निर्देश दिए कि कोई भी विद्यालय खेल किट का पेमेंट नहीं करेगा। ऐसे में जिन विद्यालयों में खेल किट पहुंच गई थी उनमें तब से लेकर आज तक उनका उपयोग नहीं किया गया। प्रधानाचार्यों का मानना है कि भुगतान न होने की दशा में उनसे कभी भी किट को वापस करने को कहा जा सकता है, ऐसे में वे इसका उपयोग ही नहीं कर रहे हैं, लेकिन फिर भी जिले भर के अधिकांश विद्यालयों में बिना खेलकूद सामग्री के खेल हो रहे, लेकिन यह खेलकूद सिर्फ कागजों में ही कराए रहे हैं।
सिर्फ कबड्डी, खो-खो से चलाया जा रहा काम
परिषदीय स्कूलों में कबड्डी, खो-खो, दौड़, ऊंचीकूद आदि प्रतियोगिताएं कराकर कोरम को पूरा किया जा रहा है। शिक्षकों ने बताया कि जब उनके पास सुविधाएं नहीं है, तो जो संभव है, वहीं खेल बच्चों को खिला लेते हैं, जबकि खेल किट में क्रिकेट, बैडमिंटन, फुटबॉल, बॉलीवॉल आदि खेलों के लिए सामग्री उपलब्ध थी। ऐसे में यदि अच्छी क्वालिटी की किट मिलती तो स्कूलों में ये खेल भी कराए जा सकते थे।
पिछल साल स्कूलों में जो खेल किट पहुंची थी, उसकी जांच चल रही है। जांच पूरी होने के उपरांत ही उसमें कुछ कह पाना संभव होगा। बाकी स्कूलों में खेलकूद प्रतियोगिताएं कराई जा रही है। -रामपाल सिंह राजपूत, बीएसए