बदायूं। मंगलवार को जिले में तीसरे चरण का मतदान शांतिपूर्वक निपट गया, लेकिन अब हार-जीत को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। अगर किसी ने हार जीत को लेकर शर्त लगाई तो उसकी खैर नहीं है। पुलिस उसके खिलाफ जुआ खेलने के आरोप में एफआईआर दर्ज करेगी।
अक्सर चुनाव के बाद हार-जीत की चर्चाएं भी खूब होती हैं, तो कभी-कभी चर्चाओं के दौरान ही बात इतनी बढ़ जाती है कि झगड़ा तक हो जाता है। लोग अपने-अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए शर्त तक लगा बैठते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में दो किसानों के बीच शर्त लगी थी। शर्त यह थी कि अगर एक पक्ष का उम्मीदवार जीतेगा तो वह दूसरे पक्ष के पांच बीघा खेत में फसल करेगा। उनके बीच में लिखित में शर्त हुई थी। शर्त पत्र खूब वायरल हुआ था। जब पुलिस ने संज्ञान लिया तो दोनों ही पक्ष अपने-अपने बयानों से मुकर गए और शर्त को एक मजाक बताया था।
इस लोकसभा चुनाव में भी दो अधिवक्ताओं के बीच बहस हो गई है। एक अधिवक्ता ने सपा को जिताने की बहस कर डाली तो दूसरे ने भाजपा को। उनके बीच में भी बाकायदा लिखित में स्टांप पेपर पर नोटरी पब्लिक से रजिस्टर्ड करवाकर दो लाख रुपये की शर्त लगी है। अब उनकी शर्त का स्टांप पेपर वायरल हुआ तो दोनों अधिवक्ता भी पीछे हट गए। उन्होंने उझानी कोतवाली जाकर पुलिस को लिखकर दिया कि उनके बीच मजाक हुई थी, किसी ने उसको वायरल कर दिया। फिलहाल स्थिति यह है कि शर्त लगाना कानून के शिकंजे में फंसना है। पुलिस भी ऐसे लोगों पर नजर बनाए हुए है।
शर्त लगाना, सट्टा लगाना या फिक्सिंग करना गैरकानूनी है। इसमें जुआ खेलने के आरोप में एफआईआर दर्ज हो सकती है। इसमें जुर्माने का प्रावधान है। - अरविंद कुमार शर्मा, अधिवक्ता
कानून सभी के लिए बराबर है। इसके साथ किसी को खिलवाड़ करने नहीं दिया जाएगा। शर्त लगाने पर भी कानून के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।- आलोक प्रियदर्शी, एसएसपी