उझानी। स्वयं सहायता समूह की चार महिलाओं से आंगनबाड़ी में नौकरी दिलाने के नाम पर छह लाख रुपये ठग लिए गए। उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिया गया। धोखाधड़ी में एक दंपती का नाम सामने आया है। महिलाओं ने कोतवाली पहुंचकर शिकायत की तो पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
चारों महिलाओं को ब्लॉक क्षेत्र में अलग-अलग आंगनबाड़ी केंद्र पर बतौर कार्यकर्ता की तैनाती का फर्जी नियुक्ति पत्र बाल विकास परियोजना अधिकारी, उझानी (बदायूं) की ओर से दिनांक 20 जुलाई 2024 को जारी किया गया।
पीड़ित जैनब से गांव मिहौना निवासी दंपती ने आंगनबाड़ी की नौकरी दिलाने की बात कहते हुए दो लाख रुपये मांगे। जैनब ने डेढ़ लाख रुपये उन्हें सौंप दिए। इसी तरह गंगा देवी से डेढ़ लाख, शिमला देवी से दो लाख और शीतल से एक लाख रुपये आंगनबाड़ी में भर्ती के नाम पर लिए।
जुलाई में उन्हें नियुक्ति पत्र मिला। जब वह पत्र लेकर योगदान आख्या प्रस्तुत करने के लिए विभाग के जिला मुख्यालय स्थित कार्यालय पहुंचीं तो उन्हें फर्जीवाड़े का पता चला। मुख्यालय पर पता चला कि आंगनबाड़ी में इस साल कोई नियुक्ति नहीं हुई है। ठगी का अहसास होने पर चारों महिलाओं ने आरोपी दंपती से रकम लौटाने को कहा। लेकिन दंपती ने रुपये किसी अन्य युवक को देने की बात कही। पांच महीने बाद भी जब महिलाओं को रुपये नहीं लौटाए गए तो उन्होंने सोमवार की दोपहर कोतवाली पहुंचकर पुलिस से शिकायत की। प्रभारी निरीक्षक नीरज मलिक ने बताया कि महिलाओं ने शिकायत की है। उस पर जांच की जा रही है। जांच के बाद ही कार्रवाई होगी।
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पीएम आवास दिलाने के नाम पर भी कर ली ठगी
- मानकपुर निवासी जैनब ने बताया कि आरोपी दंपती ने डूडा कार्यालय में अपनी पैठ बताकर उसे गुमराह किया। इसके बाद आरोपी दंपती ने उसके जरिये गांव के पांच लोगों को प्रधानमंत्री आवास दिलाने के नाम पर प्रति व्यक्ति 10-10 हजार रुपये लिए। जिन पांच लोगों ने रुपये दिए थे, वह अब जैनब के घर चक्कर काट रहे हैं।
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शीतल का रिश्तेदार भी एक लाख रुपये की चपेट में आया
निजामपुर निवासी शीतल के रिश्तेदार सोहित को भी इसी दंपती ने शिकार बना लिया। मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव पतरचोहा निवासी सोहित से सदर तहसील में नौकरी के नाम पर एक लाख रुपये वसूले गए। हालांकि सोहित अभी सामने नहीं आया है, लेकिन पुलिस को सौंपे गए शिकायती पत्र में इसका जिक्र किया गया है।
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