उझानी। पलिया में गंगा से बालू खनन का विरोध करने पर धंधेबाजों ने वनरक्षक पर लोहे की सरिया से हमला कर दिया। उन्हें घेरने की कोशिश भी की गई, लेकिन भाग जाने की वजह से उनकी जान बच गई। वन रक्षक ने तीनों धंधेबाजों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस गिरफ्तारी के लिए तलाश शुरू कर दी है।
वन रक्षक वीकेंद्र कुमार ने बताया कि वह तीन दिन पहले पलिया के पास आरक्षित वन क्षेत्र में पहुंचे तो तड़के करीब छह बजे तीन बुग्गी (बैलगाड़ी) में गंगा की बालू भरी जा रही थी। उन्होंने इसका विरोध किया तो बुग्गी चालकों ने गाली गलौज की। बुग्गी चालक पड़ोसी गांव चौसिंगा निवासी विनेश पुत्र ब्रजलाल ने सरिया से उन पर हमला कर दिया। वनरक्षक ने मौके पर से भागकर जान बचाई। उसके बाद आसपास इलाके में कार्यरत सुरक्षा श्रमिकों को बुला बालू खनन करने वालों का पीछ़ाकर चौसिंगा गांव पहुंचे।
चौसिंगा में तब तक आरोपी अपनी- अपनी बुग्गी से बालू अनलोड कर चुके थे। वनरक्षक ने पुलिस को भी फोन कर दिया। पुलिस पहुंची तो धंधेबाज मौके पर से भाग गए। पुलिस ने तीनों बुग्गियों को कब्जे में ले लिया। पुलिस ने आरोपी विनेश, राजू पुत्र सुग्रीव और सुरेंद्र पुत्र नत्थू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। प्रभारी निरीक्षक नीरज कुमार मलिक ने बताया कि आरोपियों की तलाश की जा रही है। इसकी विवेचना कछला चौकी इंचार्ज कपिल कुमार को सौंपी गई है।
गंगा की तलहटी में होता है सफेद रेत का काला धंधा
गंगा में बाढ़ आने के बाद तलहटी के इलाकों से चोरी-छिपे बालू का खनन शुरू कर दिया है। पिछले सालों में भी बालू लदीं बैलगाड़ियों के पकड़े जाने का मामला सामने आ चुका है। कोतवाली पुलिस ने पहले भी बैलगाड़ियों को पकड़ा था। इसके अलावा बालू लदीं ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही देखने को मिल जाती है। कादरचौक रोड के रास्ते बालू लदी ट्रॉलियां कस्बे में आती हैं। कोतवाली और कादरचौक क्षेत्र में बालू खनन का कोई अधिकृत प्वाइंट नहीं है।