नगर के ऐतिहासिक देवी मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटना शुरू हो गई है। प्रतिदिन श्रद्धालु भारी संख्या में मंदिर पहुंचकर मां के दरबार में मत्था टेककर परिवार सहित मेले का आनंद उठा रहे हैं। मंदिर में भारी संख्या में साधु संतों का भी जमावड़ा हो रहा है। साधुओं और भजन प्रेमियों की टोलियां जगह-जगह भजन कीर्तन कर मां का गुणगान कर रही हैं। कहीं भजन-कीर्तन की धूम है, तो कहीं चिलम से उठता धुंआ, कोई धूनी रमाए बैठा है, तो कोई प्रवचन कर रहा है।
तीन रूपों में हैं मां की प्राचीन प्रतिमा
कर्म भक्ति और ज्ञान की त्रिविधि मंदाकिनी बहाने वाला मां का स्वरूप भक्तों के लिए कल्पतंत्र समान है। मां की प्राचीन प्रतिमा में तीन देवियों का प्रतिरूप समाहित है। यह देवियां मां काली शक्ति का रूप, मां लक्ष्मी स्वरूप हैं, इसके अतिरिक्त इस प्रतिमा में अनेक छोटे-छोटे प्रतिरूप हैं। जो देखने में तो अलग नजर आते हैं, मगर आज तक कोई भी भक्त इसकी सही गिनती नहीं कर पाया है।
मेले में प्रतिदिन हो रहे भंडारे
श्रद्धालु मां के दरबार में मत्था टेककर मनौतियां मांगते हैं। मनौतियां पूरी होने पर परिवार सहित मेले में आकर माता रानी के दरबार में भंडारों का आयोजन करते हैं। जिनमें हजारों लोग भंडारे का प्रसाद ग्रहण करते हैं।
मेले में सपरिवार आनंद उठा रहे लोग
मेले में प्रतिदिन लोगों की भारी भीड़ पहुंच रही है। श्रद्धालु मां के दरबार में मत्था टेकने के बाद जमकर मेले का लुत्फ उठा रहे हैं। सभी अपनी-अपनी जरूरतों की चीजों की खरीददारी कर रहे हैं। मेले में महिलाओं की पहली पसंद जहां मीना बाजार है, वहीं बच्चे फास्टफूड कार्नर पर व्यंजनों का आनंद ले रहे हैं। झूले, सर्कस तथा खेल तमाशे भी बच्चों की भारी भीड़ खींच रहे हैं। वहीं युवाओं की पसंद नृत्य पार्टियां और नौटंकी बनी हुई है।