मंडलीय टीम ने की 166 घरों की जांच, फिर भी लार्वा पर लगाम नहीं
ग्रामीण मोहन के मुताबिक, गांव में 60 से अधिक परिवारों के लोग बुखार से परेशान हैं। बरेली से आई मंडलीय एंटीलॉलोजिस्ट अधिकारी डॉ. अखिलेश्वर सिंह ने बताया कि शुक्रवार को बीबीपुर गांव में 166 घरों की जांच की। जांच के दौरान 10 घरों में लार्वा मिला। 334 ड्रमों की जांच की। इसमें 18 में लार्वा मिला, जो बृहस्पतिवार की अपेक्षा कम है।
बृहस्पतिवार को 167 घरों की जांच की थी, तब 25 घरों में लार्वा मिला था। वहीं 455 ड्रम में से 65 में लार्वा मिला था। डॉ. अखिलेश्वर ने बताया कि डेंगू के तीन मरीज उन्हें ऐसे मिले जो निजी अस्पताल में भर्ती थे। उनका यह कहना है कि 500 की आबादी में 91 लोग बुखार से पीड़ित हैं। इस गांव को आउट ब्रेक नाम दिया है। इसमें अचानक डेंगू के हमले की बात सामने आना बताया गया है। हालांकि लगातार गांव में लार्वा मिलना मच्छररोधी अभियान की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े कर रहा है।
गांव में सफाई के लिए कांग्रेसी आज से देंगे धरना
बदायूं। डेंगू-मलेरिया प्रभावित बीबीपुर गांव में शुक्रवार को कांग्रेस जिलाध्यक्ष अजीत यादव ने दौरा कर ग्रामीणों से संवाद किया और बीमारों का हाल जाना। ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि हर घर में मरीज हैं, 150 से अधिक लोग निजी अस्पतालों में भर्ती हैं। कर्ज और गहने बेचकर ग्रामीण अपना इलाज करा रहे हैं। जलनिकासी न होने से मुख्य मार्ग पर घुटनों तक पानी भरा है। बीबीपुर-फतेहपुर रास्ता बंद है, तालाब कूड़े से पटे हैं। अजीत यादव ने शनिवार से गांव में धरने का ऐलान किया। इस दौरान दीपक मिश्रा, राजीव पटेल, प्रधान धीरेन्द्र सिंह मौजूद रहे।
डॉक्टर व अधिकारियों सहित 40 ने गांव में डाला डेरा
शुक्रवार को डिप्टी सीएमओ डॉ. सनोज, जिला मलेरिया अधिकारी अमित तिवारी, डीसीपीएम अरविंद राणा, एमओआईसी जगत डॉ. असलम, बीपीएम मोहम्मद शाहबाज और बीसीपीएम मानवेंद्र सिंह समेत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी टीमों के साथ गांव में मौजूद रहे। डॉक्टर अधिकारियों की संख्या 40 रही। अधिकारियों ने गांव का निरीक्षण कर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया और टीमों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। प्रधान धीरेंद्र यादव ने भी सहयोग किया।
सफाई के नाम पर भेजे सिर्फ 10 कर्मचारी
स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी फैलने के बाद 15 टीमें गांव में उतार दीं, वहीं सफाई व्यवस्था के लिए डीपीआरओ कार्यालय की ओर से सिर्फ 10 कर्मचारी ही भेजे गए। इतने बड़े गांव में सीमित कर्मचारियों से सफाई की औपचारिकता पूरी करने से गंदगी और जलभराव की समस्या पूरी तरह दूर नहीं हो सकी। ग्रामीण किशन, सोनू, विशाल का कहना है कि बीमारी के बीच केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीन पर व्यापक सफाई अभियान की जरूरत है।