कोहरे और शीतलहर से दिन भर ठिठुरते रहे लोग
दिसंबर ने जाते-जाते कहर ढाना शुरू कर ही दिया। गुरुवार को कोहरा, बादल और शीतलहर के चलने से लोग दिन भर ठिठुरते रहे। भीषण सर्दी में घरों से निकलने से पहले सर्दी से बचाव का इंतजाम करके ही घरों से निकले। कोट, पेंट, हाफ स्वेटर में नजर आने वाले लोग जैकेट, मफलर, टोपी पहने नजर जाए। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले तमाम लोग तो कंबल लपेटकर बाजार में पहुंचे। शीतलहर चलने की वजह से पारा दो डिग्री सेल्सियस गिर गया।
बीते दिनों सुबह और रात की सर्दी के बाद दिन में सूर्यदेव के दर्शन होने की वजह से लोगों को सर्दी का ज्यादा एहसास नहीं होता था, लेकिन गुरुवार को सुबह रोजाना की अपेक्षा घना कोहरा था। इससे लोगों का सड़क पर वाहन चलाना मुश्किल हो रहा था। वहीं, गलन होने की वजह से हाथ-पैरों में शून्य जैसी स्थिति हो रही थी। सुबह ऐसी सर्दी झेलने वालों को उम्मीद थी कि सूर्यदेव के दर्शन होने पर सर्दी से राहत मिल जाएगी। बादल छाने की वजह से सूर्यदेव नहीं निकले तो लोगों को दिनभर ठिठुरना पड़ा। ऐसे में चाय और कॉफी की दुकानों पर ग्राहकों की खासी भीड़ जमा रही।
घरों से स्कूल जाने वाले बच्चे रिक्शा, बस, टैक्सी एवं अन्य वाहनों से जाते वक्त सर्दी से बचाव के लिए स्वेटर जैकेट सब पहनकर गए। सर्दी से बचाव करने के लिए तमाम स्थानों पर लोगों ने अलाव जलाकर सर्दी से बचने का प्रयास किया।
बिन स्वेटर स्कूल जा रहे बच्चे
भीषण सर्दी होने पर जहां लोग घरों से निकलने से पहले कंबल, जैकेट, मफलर, जूते-मोजे पहनकर घरों से निकले। वहीं, परिषदीय स्कूलों के छात्र-छात्राएं टाट-फट्टे पर बैठकर शिक्षण कार्य करते नजर आए। इसके साथ ही अधिकांश बच्चे बिना स्वेटर के बैठे हुए नजर आए।