बदायूं। गंगा का जलस्तर 20 दिनों से लगातार खतरे के निशान से ऊपर है। इससे आसपास के 19 गांवों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। इन गांवों के लोगों को प्रशासन ने शिविरों में शरण दी है। लगातार पानी भरे होने के कारण गांवों के दर्जनों मकान अब ढहने के कगार पर हैं। खेती चौपट हो चुकी है। कुछ कच्चे मकान गिर गए हैं और पक्के मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है। रविवार को भी गंगा खतरे के निशान से 13 सेंटीमीटर ऊपर बही। बाढ़ खंड के अधिकारियों ने बताया कि पहली बार ऐसा हुआ है कि गंगा का जलस्तर इतने दिनों तक खतरे के निशान से ऊपर है।
चार अगस्त को गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार किया। उसके बाद से गंगा कहर बरपा रही है। इससे सहसवान से लेकर उसहैत तक के 19 गांवों में बाढ़ का पानी भर हुआ है। सहसवान के गांव भमरौलिया, वीरसहाय नगला, खागी नगला, तौफिया नगला आदि छह गांवों को खाली करा लिया गया है। उनको तटबंध पर ठहराया गया है। 20 दिनों से लोग तटबंध पर रह रहे हैं। लोगों को पेट भरने में जद्दोजहद करनी पड़ रही है। पशुओं की हालत खराब है। उनका पेट भरना किसानों को भारी पड़ रहा है। खेतों में पानी इतना है कि फसलें खराब हो गई हैं। गांवों में पानी भरे रहने की वजह से मकान गिरने के कगार पर हैं। खेतों में तेजी से कटान हो रहा है। कई मंदिर और पेड़ गिर कर पानी के साथ बह गए हैं। अब मकानों के गिरने का डर लोगों को सता रहा है। तोफिया नगला के रहने वाले वीर सिंह का कहना है कि ऐसा पहली बार देखने को मिला है कि 20 दिन बाद भी बाढ़ का पानी घरों में भरा है। पहले दो चार दिन बाढ़ का पानी भरकर सूख जाता था। इस बार गंगा समस्या ज्यादा है। अभी कई दिनों तक घरों में पानी भरे रहने की संभावना है। अधिक दिनों तक पानी भरने से मकान गिर सकते हैं।
रूम सिंह।
रूम सिंह।
रूम सिंह।