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एक और मकान गंगा में समाया, प्रशासन ने लागों को स्कूल में रोकने की बनाई व्यवस्था

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उसहैत। गंगा नदी में अब जलस्तर कम होने लगा है। इसकी वजह से अब क्षेत्र में कटान की स्थिति बन गई है। गुरुवार को असमया रफतपुर में एक और पक्का मकान गंगा में समा गया। वहीं, प्रशासन ने गांव के लोगों को एक स्कूल में रोकने की व्यवस्था बनाई है।
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क्षेत्र के गांव असमया रफतपुर में पिछले चार दिनों में आठ कच्चे व पक्के मकान गंगा में समा चुके है। गुरुवार को दुर्गापाल का भी पक्का मकान गंगा में समा गया। गांव में हो रहे कटान से ग्रामीणों में बेचैनी साफ दिखाई दे रही है। गुरुवार को तहसीलदार वीरेंद्र कुमार गांव पहुंचे और मौके पर हालात का जायजा लिया। उसके बाद में उन्होंने ग्रामीणों से बात की। कहा कि प्रशासन की तरफ गांवों के लिए समाज कल्याण पूर्व माध्यमिक विद्यालय का चयन किया गया है। जहां सभी के रुकने, खाने-पीने की व्यवस्था है। ग्रामीणों ने तहसीलदार से उस स्कूल में जाने से मना कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि वह स्कूल गांव से काफी दूर है। ऐसे में काफी परेशानी होगी। गांव के आसपास के किसी स्कूल में उन्हें रोकने की व्यवस्था की जाए।
असमया रफतपुर के लोगों को उसहैत के एक स्कूल में रोकने के लिए कहा गया था। इसे लेकर ग्रामीण से वार्ता हुई थी लेकिन ग्रामीणों ने वहां जाने से मना कर दिया। ऐसे में गांव के ही प्राथमिक विद्यालय को खुलवाया गया है। वहां पर उनका सामान रखवाया गया है।
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- वीरेंद्र कुमार, तहसीलदार, दातागंज
बाढ़ चौकियों पर पहुंच रहे कर्मचारी..पर देखरेख मोबाइल पर
बदायूं। जनपद में बाढ़ की स्थितियों को देखते हुए जिला प्रशासन की बाढ़ चौकियों पर कर्मचारियों को तैनात किया है। हालांकि ये कर्मचारी गांव में अपनी चौकियों पर जाने की बजाए मोबाइल से स्थानीय लोगों से संपर्क कर जानकारी जुटा रहे हैं और अपने अधिकारियों को इससे अवगत करा रहे हैं। इससे बाढ़ चौकियों की उपयोगिता पर प्रश्न चिह्न लग रहा है।
जिले में पिछले कुछ दिनों में गंगा के जलस्तर में हुई बढ़ोतरी के चलते किसानों की कई बीघा फसल जलमग्न हो गई। गंगा का पानी गांव के पास पहुंच गया। इससे उसहैत क्षेत्र के गांव असमया रफतपुर में कई कच्चे, पक्के घर जलमग्न हो गए। वहीं, सहसवान के गांव परशुराम नगला, धापड़, वीर सहाय नगला, टोटपुर करसरी, भमौलिया आदि में भी जमीन का कटान हो रहा है। इससे ग्रामीणों में भय व्याप्त है। जिला प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया है ताकि अधिकारियों को यथा स्थिति की जानकारी हो सके। लेकिन यहां तैनात कर्मचारी गांव में कुछ देर ही रुकते हैं। बाकी समय गांव वालों से फोन पर जानकारी लेते हैं। इससे बाढ़ चौकियों की उपयोगिता पर ही प्रश्नचिह्न लग रहा है।
बाढ़ चौकियों की संख्या
- सहसवान -चार
- दातागंज-सात
- कार्यरत नाव-नौ
गंगा के जलस्तर पर लगातार निगाह बनाए हैं। इसे लेकर 11 बाढ़ चौकी सक्रिय की गई हैं। यहां पर कर्मचारियों की तैनाती की गई। सभी से कहा गया है कि गांव में रहकर स्थिति को देखें। इसमें लापरवाही मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।
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- नरेंद्र बहादुर सिंह, एडीएम एफआर
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