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खेतों में भर गया पानी, नरौरा से दो लाख क्यूसेक से ज्यादा का डिस्चार्ज

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बदायूं। बुधवार को नरौरा बैराज से दो लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया है। ऐसे में कछला के गई गांवों में खेतों में पानी भर गया है वहीं सहसवान में पहले से ही कई बीघा फसल गंगा में समा चुकी है। जिस तेजी से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है, उस हिसाब से गांवों में भी पानी भर जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। अगर गांव में पानी भरता है, तो वहां के हालात और भी ज्यादा खराब हो सकते हैं। नरौरा से पानी छोड़े जाने की वजह से कछला का गेज बढ़कर 163.65 पहुंच गया है। वहीं बिजनौर से भी एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया है।
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पहाड़ों पर होने वाली बारिश की वजह से पिछले कुछ दिनों से हरिद्वार, बिजनौर और नरौरा बांधों पर पानी का ज्यादा दबाव पड़ने लगा था, जिसकी वजह से वहां पर लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। ऐसे में कछला और सहसवान इलाके के गांवों की ओर गंगा ने अपना रुख कर लिया है। गंगा के जलस्तर बढ़ने की वजह से कुछ दिनों से कई गांवों के संपर्क मांग कट गए हैं। बुधवार को नरौरा से दो लाख 15 हजार 322 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिसकी वजह से कछला के गेज में बाढ़ खंड विभाग ने बढ़ोतरी दर्ज की है। बुधवार को कछला का गेज 163.65 दर्ज किया गया है। वहीं एसडीएम सदर सीपी सरोज ने बुधवार को रामसहाय नगला और मजरा सुंदरायन गांव का निरीक्षण किया। उन्होंने गांव के पास में होकर जा रही गंगा नदी को देखा। उन्होंने गोताखोर को गंगा में उतारकर पानी के बहाव का जायजा लिया। उसके बाद में एसडीएम सदर ने ग्रामीणों से वार्ता की। साथ ही उन्हें समझाया कि कोई भी व्यक्ति नदी के तरफ अकेला न जाए। खासतौर पर बच्चों पर विशेष निगाहें रखी जाए। वहीं एसडीएम ने कानूनगो और लेखपालों को भी निर्देशित किया कि वह बाढ़ के हालातों पर विशेष निगाह रखें।
एडीएम एफआर ने नाव से लिया गांवों को जायजा
सहसवान। नरौरा से पानी अधिक छोड़े जाने की वजह से गंगा में उफान आ गया। तेजी से बढ़ता हुआ पानी गंगा-महावा बांध से आ टकराया। इधर पहले ही बाढ़ के पानी से घिरे गांवों में हालात और खराब हो गए है। आशंका जताई जा रही है कि गुरुवार तक बाढ़ का पानी गांवों में भी घुस सकता है। सभी संपर्क मार्ग पहले ही कटे हुए हैं और गांव चौतरफा पानी से घिरे हैं। एडीएम एफआर नरेंद्र बहादुर सिंह ने बाढ़ ग्रस्त गांवों में जाकर दौरा किया और ग्रामीणों से गांव खाली कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की अपील की।
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पिछले पांच दिनों से गंगा के जलस्तर में लगातार उतार चढ़ाव बना हुआ था। बांध के उस पार बसे करीब आधा दर्जन गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। सभी गांव के संपर्क मार्ग कटने के साथ ही ग्रामीणों की फसलें जलमग्न हो गई थीं। बुधवार नरौरा से दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया है। इससे गंगा में उफान आ गया। एडीएम एफआर नरेंद्र बहादुर सिंह ने तहसीलदार धीरेंद्र कुमार के साथ बाढ़ प्रभावित गांव वीरसहाय नगला, खागी नगला, परशुराम नगला, रज्जू नगला, भमरौलिया का नाव से निरीक्षण किया। तहसीलदार ने बताया कि गांव छोड़कर आने वाले ग्रामीणों को प्राथमिक विद्यालयों में शरण दिलाई जाएगी। साथ ही जरूरत का सामान भी मुहैया कराया जाएगा।
बाढ़ खंड ने समय रहते कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त जीएम बांध की मरम्मत कराने की जरूरत महसूस नहीं की। जिसके चलते खिरकवारी मानपुर पुख्ता और धापड़ के बीच कई स्थानों पर जीएम बांध क्षतिग्रस्त है। बाढ़ की भयानक स्थिति होने पर जीएम बांध के कई स्थानों पर कट जाने की प्रबल संभावना बनी हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि परशुराम नगला के पास गंगा ने कटान भी शुरू कर दिया है। ग्रामीणोें की पानी में डूबी फसलें नष्ट होने लगी हैं। इस मौके पर राजस्व निरीक्षक वीरेंद्र पाल, हल्का लेखपाल सत्यपाल सिंह आदि मौजूद रहे।
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