जिले में बुखार से लोगों की जान जाने का सिलसिला जारी है। स्वास्थ्य महकमा अपनी नाकामी छिपाने के लिए आंकड़ेबाजी में उलझा है। बृहस्पतिवार को उझानी इलाके में एक युवती और कुंवरगांव में बुजुर्ग की बुखार से मौत हो गई। गांव-गांव सैकड़ों लोग बुखार से पीड़ित हैं।
उझानी। सरौता निवासी लालराम की 19 वर्षीय बेटी मीरा को बुधवार सुबह बुखार आया। लालाराम के मुताबिक उन्होंने कछला के निजी चिकित्सक से बेटी को दवा दिलाई। दोपहर तक उसकी तबीयत कुछ ठीक रही, लेकिन दोपहर बाद हालत दोबारा बिगड़ गई। वह बेटी को चिकित्सक के पास ले गए तो वहां से जिला मुख्यालय ले जाने को कह दिया गया। मगर शहर ले जाते वक्त रास्ते में मीरा ने दम तोड़ दिया।
कछला के वार्ड नंबर-एक निवासी कुंवरपाल, रफानीनगला के रुकुमसिंह की 23 वर्षीय बेटे बबलू और बहोरानगला गांव के फूलसिंह की बेटी संगीता की इससे पहले बुखार की चपेट में आकर मौत हो चुकी है। ग्रामीणों की माने तो चार मौत के बाद भी सेहत महकमे की ओर से गांवों में अब तक डॉक्टरों की टीम नहीं पहुंची है। बहोरा नगला में बीमार तीन बच्चों का घरवालों को निजी चिकित्सक के पास ले जाकर इलाज कराना पड़ा था।
कुंवरगांव। ग्राम आजमगंज मड़िया निवासी 55 वर्षीय रामप्रकाश को पिछले तीन दिन से बुखार आ रहा था। उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां इलाज के दौरान बुधवार को उनकी मौत हो गई। भाई ने ने बताया रामप्रकाश को पहले एक झोलाछाप से दवा दिलाई थी।