वर्षों से चली आ रही है परंपरा
कैथोला के सेवाराम कश्यप ने बताया कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इस बहाने अपने पूर्वजों की गाथा को भी याद कर लिया जाता है। चंदेल वंश, आल्हा और पृथ्वीराज चौहान से जुड़ी रस्म है।
कचौरा के मुन्नालाल यादव ने बताया कि महोबा शासन में यहां के जमींदार आल्हा पक्ष के साथ थे। उसी युद्ध में जाने की वजह से एक दिन पहले त्योहार मनाया था जो अब तक चल रहा है। आल्हा-ऊदल के इतिहास से संबंधित पुस्तक में इसका प्रसंग छपा हुआ है।