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चूल्हा तो तब जलेगा, जब सही होगी फसल....

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बदायूं। महिलाओं की प्राथमिकता में घर का चौका चूल्हा होता है, लेकिन घर का चूल्हा जलाने के लिए रुपयों की जरूरत होती है, और एक किसान के घर में आमदनी का जरिया खेती और फसल होती है। मगर अच्छी फसल लेने के लिए कई चीजों की जरूरत होती है उसके से एक प्रमुख चीज खाद है, जिसका जिले भर में संकट बना हुआ है। फसल के लिए खाद न मिलने से खड़े हुए संकट की चिंता अब घर के मुखिया किसान के साथ उसके घर की महिलाओं को भी सताने लगी है। इसी चिंता में महिलाओं ने चूल्हा चक्की छोड़कर खाद पाने के लिए सेंटर पर जाकर लाइन में लगना शुरू कर दिया है। चूंकि महिलाओं की संख्या कम होने के कारण उन्हें खाद जल्दी मिल जाती है इसलिए अधिकांश घरों की महिलाएं तपती धूप में खाद लेने को लाइनों में खड़ी नजर आ रही हैं। खाद सेंटरों पर लगने वाली महिलाओं की लाइन उनकी मजबूरी बयां कर रही है। शुक्रवार को भी सेंटरों पर भी यही स्थिति देखी गई।
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इस वक्त किसानों की रात की नींद और दिन का चैन खो चुका है। किसान हर वक्त अपनी फसल और खाद के बारे में सोच रहा है। इसकी वजह मुख्य वजह जिले में हो रही खाद की किल्लत है। क्योंकि धान की रोपाई के बाद में इस वक्त फसल में खाद की बेहद जरूरत है, अगर समय से धान की फसल में खाद नहीं लगी, तो आने वाले समय में धान की फसल उतनी अच्छी पैदावार नहीं देगी, जिसकी अमूमन किसानों को उम्मीद लगी रहती है। यही वजह है कि किसान खाद पाने के लिए हर वो जतन कर रहा हैं, जिससे उसे पर्याप्त मात्रा में खाद मिल सके, लेकिन जिले मेें खाद का संकट बना हुआ है। इसका फायदा प्राइवेट दुकानदार उठा रहे हैं और वे मुंहमांगे दामों पर खाद बेच रहे हैं।
दरअसल, जिले में खाद की सबसे बड़ी दिक्कत पीसीएफ और इफको के बीच में चल रहे आपसी विवाद का नतीजा है। क्योंकि इफको का पीसीएफ पर पुराना बकाया चल रहा है, जो उनकी ओर से नहीं दिया गया है। वहीं पिछले साल जिले में करीब तीन करोड़ रुपये का और खाद घोटाला हो गया। इस वजह से इफको ने पीसीएफ को खाद देने से इनकार कर दिया। जिले में पीसीएफ की 97 समितियां अभी सक्रिय हैं, लेकिन आपसी तालमेल नहीं होने की वजह से इन समितियों को खाद नहीं मिल रही है। जो जिले में खाद का संकट होने का बड़ा कारण बनी है।
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छह सेंटरों पर पहुंची खाद
-शुक्रवार को इफको के छह सेंटरों पर 483 मीट्रिक टन यूरिया भेजी गई। इसमें उझानी सेंटर पर 3167, कादरचौक सेंटर पर 1940, उसावां सेंटर पर 2285, दातागंज सेंटर पर 1447, बिसौली सेंटर पर 1300 और बदायूं में 614 कट्टे यूरिया भेजी गई। कुल 483 मिट्रिक टन यूरिया बदायूं जिले को मिली है। वहीं शहर में अधिक मांग को देखते हुए 650 बोरी की एक गाड़ी उझानी से बदायूं अतिरिक्त भेजी गई है।
क्या बोली महिलाएं-------
घर में से लोग दो दिन से खाद लेने के लिए यहां पर आए थे, लेकिन आदमियों की लाइन यहां पर बहुत लंबी लग रही है। ऐसे में उन्हें खाद नहीं मिल पाई थी। इसलिए आज हम खाद लेने के लिए आए हैं। ताकि खेतों में समय से खाद लग सके।
-चहेती, कटिन्ना
सुबह जैसे ही उठे, बिना चाय पिए, खाना खाए यहां पर आ गए। दोपहर हो गई, लेकिन मजबूरी है, लाइन छोड़कर नहीं जा सकते हैं। जैसे ही लाइन छोड़कर गए, तो भीड़ अधिक है, दोबारा लगने नहीं दिया जाएगा।
-रामकुमारी, मई बूचन
दो दिन से लाइन में लगी हुई थीं। खाद नहीं मिल पा रही है, क्योंकि थोड़ा देर से आयी थी। पर्ची नहीं मिल सकी। शुक्रवार को सुबह ही आ गई थी और लाइन में लग गई, तब जाकर पर्ची मिली है। अब उम्मीद है कि खाद हमको मिल जाएगी।
-गीता, पडौआ
चूल्हा चौका छोड़कर सीधा यहां आ गए हैं। क्योंकि चूल्हा चौका तो कल भी कर लेंगे, लेकिन फसल में जितनी देर से खाद लगेगी, उतना ही कम अनाज पैदा होगा। इसी कारण खाद लेने के लिए आए हैं, सुबह से लाइन में लगे हैं।
-अनिता रसूलपुर
अभी तक खाद की जिले में कुछ कमी थी। गुरुवार को डीएम इफको गए थे, वहां के अधिकारियों से वार्ता की। इफको की तरफ से भरोसा दिया गया कि वहां से अब पांच सौ मीट्रिक टन खाद मुहैया कराई जाएगी। शुक्रवार को 483 मीट्रिक टन खाद जिले को मिली है। शनिवार को भी पांच सौ मीट्रिक टन खाद इफको की ओर से भेजी जाएगी। इसके बाद में खाद लगातार आती रहेगी। अब खाद का संकट खत्म हो जाएगा।
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-विनोद कुमार, जिला कृषि अधिकारी
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