बदायूं। जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर फैली अव्यवस्थाएं किसी से छिपी नहीं है। ऊपर से जिम्मेदार अधिकारी अपनी मनमर्जी कर रहे हैं। कई माह से प्रसूताओं को भोजन नहीं दिया जा रहा था, जबकि भोजन मुहैया कराने के सारे फर्जी रिकॉर्ड तैयार कर लिए गए। अभिलेखों में प्रसूताओं को डिस्चार्ज तक दो दिन बाद किया गया। अब इस घोटाले की जांच शुरू हो चुकी है। इसके लिए सीडीओ निशा अनंत ने चिह्नित स्वास्थ्य केंद्रों का रिकॉर्ड तलब किया है।
समाजवादी पार्टी के सहसवान विधायक ओमकार सिंह यादव ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया था। उनका कहना था कि जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उझानी, जगत, कादरचौक, म्याऊं, उसावां, दातागंज, बिल्सी, सहसवान, आसफपुर और इस्लामनगर में प्रसूताओं को भोजन नहीं दिया जा रहा है। सहसवान स्वास्थ्य केंद्र पर प्रसूताओं को भोजन न दिए जाने के संबंध में उनके पास कई शिकायतें आईं थीं। इस पर उन्होंने विश्वासपात्र लोगों को भेज कर पता कराया था। जानकारी हुई कि स्वास्थ्य केंद्र पर प्रसूताओं को भोजन नहीं दिया जा रहा है। इस संबंध में स्थानीय अधिकारियों को भी अवगत कराया गया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब कहीं उन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया।
इधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर हरकत में आए डीएम दिनेश कुमार सिंह ने तुरंत तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। इसकी जांच की जिम्मेदारी सीडीओ निशा अनंत, वरिष्ठ कोषाधिकारी हरिशचंद्र यादव और परियोजना निदेशक अनिल कुमार को सौंपी। अब इसकी जांच शुरू हो गई है। सीडीओ ने इस क्रम में सभी स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों से रिकॉर्ड तलब किया है। कुछ प्रभारियों ने रिकॉर्ड उपलब्ध करा दिया है। बाकी को जल्द से जल्द रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं।
यह मांगा गया रिकॉर्ड
- प्रसूताओं को एडमिट करने संबंधी रजिस्टर
- प्रसूताओं को दिए जाने वाले आहार की पंजिका
- लेबर रूम रजिस्टर
-प्रसूताओं को डिस्चार्ज करने संबंधी रजिस्टर
-एंबुलेंस 102, 103, और 108 की रिकॉर्ड पंजिका
स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसूताओं को भोजन नहीं दिया जा रहा है। यह बहुत बड़ा घोटाला है। यह मुद्दा मैंने विधानसभा में उठाया था। जांच के लिए एक माह का समय दिया गया है। अभी इसकी रिपोर्ट मेरे पास नहीं आई है।
ओमकार सिंह यादव, सपा विधायक सहसवान