अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर बृहस्पतिवार को पूरे दिन भ्रम का माहौल बना रहा। हालांकि अधिकतर दुकानदारों ने एक दिन पहले से प्रतिष्ठानों के आगे से तख्त आदि उठा कर टीनशेड भी उतार लिए थे, लेकिन कार्रवाई शुरू करने के लिए बाजार में कोई अफसर नजर नहीं आया। ईओ और पीडब्ल्यूडी अफसर भी नहीं पहुंचे।
नगर पालिका परिषद प्रशासन ने तीन दिन पहले बाजार में मुनादी कराके अतिक्रमणकारियों को सचेत कर दिया था। अतिक्रमणकारियों को दो दिन के अंदर सामान समेट लेने की हिदायत भी दी गई थी। तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार बृहस्पतिवार सुबह से पालिका और पीडब्ल्यूडी अफसरों को अभियान शुरू करना था। बाजार में इसे लेकर हड़कंप का माहौल भी रहा। दोपहर बाद पालिका प्रशासन की ओर से स्पष्ट कर दिया गया कि ईओ संजय कुमार तिवारी जिला मुख्यालय पर होने वाली अफसरों की बैठक में व्यस्त है। जबकि पीडब्ल्यूडी के अफसर पालिका प्रशासन की सूचना के बाद भी नहीं आए।
सफाई निरीक्षक संजीव कुमार ने बताया कि दोपहर बाद बाजार की वीडियोग्राफी कराई गई है। तीन दिन पहले और मौजूदा हालात पर अफसर गौर करने के बाद ही अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू करेंगे। बता दें कि अल्टीमेटम वाले दिन से अतिक्रमणकारियों ने दुकानों के आगे से सामान समेटना शुरू कर दिया था। पालिका प्रशासन को पुलिस के पैदल मार्च का भी फायदा मिला। पुलिस ने पैदल मार्च के दौरान ठेला खोमचा वालों पर पहले से ही शिकंजा कस दिया था। बाकी बचे स्थानों पर दुकानों के सामने से टीनशेड भी हटा लिए गए हैं।
दुकानों से महंगा है सड़क किनारे का फड़
मेन मार्केट में अतिक्रमण की वस्ताविकता पर गौर करें तो सब्जी मंडी से लेकर पुरानी अनाज मंडी मोड़ तक कुछेक दुकानदारों ने सड़क किनारे सामने वाली भूमि को अपना फड़ बताकर ठेला-खोमचा वालों के लिए किराये पर उठा रखा है। फड़ पर सामान रखकर व्यापार करने वालों से मासिक शुल्क वसूला जाता है। बुधवार को पुलिस ने पैदल मार्च के दौरान अतिक्रमणकारियों को खदेड़ा तो यह बात सामने आई। शुल्क भी इतना कि कुछेक दुकानों का किराया भी उससे कम रहेगा।