अप्रैल में शैक्षिक सत्र शुरू होने के बाद बच्चों से फीस लिए जाने को लेकर प्रधानाचार्य असमंजस में हैं। वहीं, डीआईओएस की ओर से फीस समायोजन के आदेश पर शिक्षकों के सामने और समस्या खड़ी हो गई है। वह यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि आखिर फीस किस माह से ली जाए? उन्होंने इस संदर्भ में डीआईओएस से भी स्पष्ट जानकारी दिए जाने की मांग की है।
बीते दिनों डीआईओएस वीना यादव की ओर से फीस को लेकर आदेश जारी किए थे। उन्होंने साफ कहा था कि जो स्कूल मार्च में बच्चों से अप्रैल, मई, जून की फीस ले चुके हैं, वह स्कूल बच्चों की फीस समायोजित करें और इन तीन माह की फीस न लें। इस आदेश पर जहां कड़ाई से अमल करने पर जोर दिया गया वहीं स्कूल संचालन, प्रधानाचार्य इस आदेश से असमंजस की स्थिति में आ गए। उनका कहना है कि सत्र में 12 माह की फीस ली जाती है। ऐसे में अगर जून तक की फीस समायोजित की जाती है तो बच्चे से सिर्फ नौ माह की ही फीस ली जा सकेगी, जिससे कॉलेज को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि यह फरमान गले नहीं उतर रहा है। प्रधानाचार्यों का कहना है कि पहले अप्रैल से अगली मार्च तक फीस लेने का आदेश था। जो किसी हद तक ठीक है। उन्होंने इस संदर्भ में डीआईओएस से स्पष्ट जानकारी दिए जाने की भी मांग की है।
प्रधानाचार्य परिषद सम्मेलन में उठाया जाएगा मुद्दा
प्रधानाचार्य परिषद के अध्यक्ष डॉ. योगेश्वर सिंह कहते हैं कि फीस मुद्दे को लखनऊ में होने वाले प्रधानाचार्य परिषद के सम्मेलन में उठाया जाएगा। बताया कि 24, 25 अप्रैल को आयोजित सम्मेलन में उच्चाधिकारियों के समक्ष स्थिति को क्लियर किया जाएगा। प्रधानाचार्य सुनील मिश्रा ने बताया कि इस दिन आने-जाने का समय मिलाकर विशेष अवकाश होगा।
शुल्क के संबंध में जो शासन का आदेश होगा उसका पालन किया जाएगा। छात्रों से 12 महीने का शुल्क लिया जाएगा, अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूला जाएगा। अगर समायोजन किया जाना जरूरी है तो शिक्षा शुल्क का किया जाए। - सुनील मिश्रा, प्रांतीय महामंत्री संगठन, उप्र प्रधानाचार्य परिषद।