अब किसान को दोहरी मार झेलनी पड़ेगी। एक तरफ तो मौसम ने उनकी फसल को चौपट कर दिया है। दूसरी तरफ बैंक का ब्याज भरना होगा। समय से भुगतान न होने पर किसानों पर ब्याज का भार बढ़ेगा।
यहां बता दें कि बैंक केसीसी पर सात प्रतिशत की दर से ब्याज लेती है। यदि किसान साल में कम से कम दो बार में ऋ ण की अदायगी कर देता है, तो बैंक उसे तीन प्रतिशत की छूट भी दे देती है। किसान द्वारा समय पर ऋ ण की अदायगी न करने पर किसान से साढ़े तेरह प्रतिशत ब्याज वसूला जाता है। जहां एक ओर सरकार ने किसान से ऋ ण वसूली पर रोक लगा दी, वहीं वसूली न होने की स्थिति में हर किसान का खाता एनपीए में दर्ज हो जाएगा। हर खाता खराब माना जाएगा। ऐसी स्थिति में किसान पर चार प्रतिशत की जगह पर 11 प्रतिशत ब्याज का अर्थदंड पड़ेगा। हालिया तौर पर तो वसूली पर रोक लगने से किसान को भले ही कुछ राहत मिल जाए, लेकिन एक साल बाद उसके सामने और बड़ी समस्या सामने आएगी।
31 मार्च तक की वसूली को 30 जून तक बढ़ा दिया गया है। इस समय तक किसानों से सात प्रतिशत की दर से ही वसूल की जाएगी। यदि कोई किसान अपने ऋ ण की अदायगी करता है, तो उसे पूरी स्वतंत्रता है। आरबीआई के नियम के अनुसार कार्य होगा। वसूली न होने पर सभी खाते एनपीए हो जाएंगे। किसान से तो साढ़े तेरह प्रतिशत ही ब्याज वसूला जाएगा। - सुनील शर्मा, रीजनल मैनेजर