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Budaun News: खाद की कालाबाजारी और गैस सिलिंडर संकट पर भड़के किसान

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बदायूं। भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक की पंचायत रविवार को हुसैनपुर करौतियां गांव में हुई। इसमें किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। पंचायत में खाद की कमी, कालाबाजारी और घरेलू गैस सिलिंडर की उपलब्धता को लेकर किसानों ने नाराजगी जताई।
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पंचायत को संबोधित करते हुए संगठन के प्रदेश महासचिव सोहनपाल ने कहा कि सरकारी समितियों पर किसानों को समय से खाद नहीं मिल पा रही है। हालात यह हैं कि किसान खाद के लिए समितियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बाजार में खाद का एक कट्टा 300 रुपये अधिक कीमत पर ब्लैक में बेचा जा रहा है। इतना ही नहीं किसानों को खाद के साथ जबरन अन्य दवाएं खरीदने के लिए भी मजबूर किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि खेती का सीजन चल रहा है। इस समय खाद की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। ऐसे में खाद की किल्लत किसानों की परेशानी बढ़ा रही है। यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो किसान आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
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पंचायत में जिलाध्यक्ष विपिन पटेल ने घरेलू गैस सिलिंडर की समस्या भी उठाई गई। कहा कि सरकार ने पहले लोगों को लकड़ी और चूल्हे की जगह गैस उपयोग करने के लिए प्रेरित किया, लेकिन अब गैस सिलिंडर मिलने में लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। आरोप लगाया गया कि 25 दिनों तक सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। जिससे ग्रामीण परिवार परेशान हैं। किसानों ने प्रशासन से खाद की उपलब्धता करने और गैस वितरण व्यवस्था सुधारने की मांग की। पंचायत में संतोष कुमार, वीरपाल बघेल, रोहिताश सिंह, संजीव पटेल, मोहन लाल सागर, बादाम सिंह और भगवान सिंह आदि मौजूद रहे।



खाद न मिलने से ग्रामीणों में रोष



बदायूं। मुजरिया में किसानों को खाद न मिलने से उनमें रोष है, वहीं प्राइवेट तौर पर दुकानदारों द्वारा भी मनमाने दाम पर बेचने का आरोप लगाया है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि सरकारी गोदामों पर खाद की उपलब्धता नहीं होने पर मुजरिया चौराहे पर प्राइवेट तौर से दुकानदारों द्वारा खाद मनमाने दामों में बेची जा रही है। तहसील बिल्सी क्षेत्र के गांव जीजाहट के राधेश्याम,कल्याण,अशोक कुमार और मनोहर सहित दर्जनों किसानों ने बताया कि आधार कार्ड लगाने के बाद भी दुकानदार 350 से ज्यादा रुपयों में खाद का कट्टा बेच रहे हैं, जबकि सरकार के नियमों के अनुसार आधार कार्ड धारक किसानों को यूरिया का कट्टा सरकारी रेट पर मिलना चाहिए। किसानों ने जिला प्रशासन से जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। संवाद
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