बदायूं। जिले में गंगा और रामगंगा में बाढ़ का असर कुछ कम हुआ है, लेकिन कटान तेज होने से हालात काफी खराब हो रहे हैं। कटान ने खेतों समेत मकानों को भी अपनी जद में ले लिया है। उधर, संक्रामक रोगों ने दस्तक देना शुरू कर दिया है।
सहसवान क्षेत्र में इसका असर अधिक देखने को मिला है। गंगा में पानी कम होने के बाद भी जलस्तर खतरे के निशान से 16 सेमी ऊपर बह रहा है। रामगंगा में पानी कम होते ही खेतों में फसलें सड़ी हुई निकली हैं। किसान इसे लेकर माथा पीट रहे हैं। बाढ़ उनकी कड़ी मेहनत पर पानी फेर गई है। फसलों की तबाही से किसान हलकान हैं।
कटान से बांंध हुआ सुरक्षित, मकान गिरने शुरू
सहसवान। आसे नगला गांव के पास गंगा-महावा बांध पर गंगा का कटान सोमवार को थम गया। हालांकि बाढ़ खंड ने यहां अब भी बांध को सुरक्षित करने के लिए बचाव कार्य जारी रखा है। जलस्तर कम होते ही गंगा ने बांध के अंदर बसे गांव खागी नगला में कटान शुरु कर दिया है।
यहां पिछले 24 घंटे में बाबू, राजाराम, जीवन, प्रेमसिंह और धर्मेंद्र के मकान कट चुके हैं। इसके अलावा महाराज सिंह, साहब सिंह, सामंती, देशराज आदि ग्रामीणों के मकान कट रहे हैं। तहसील प्रशासन ने गांव में रह रहे लोगों से गांव खाली करके सुरक्षित स्थानों पर आने को कहा है। मकान कटने से ग्रामीणों में दहशत है। बाढ़ कम होने से जगह-जगह जलभराव और पीने का स्वच्छ पानी न मिल पाने के कारण संक्रामक रोग फैलने का खतरा पैदा हो गया है। संवाद
बीमारों को शिविरों में दी जा रहीं दवाइयां
उसहैत। तटवर्ती इलाकों में बाढ़ अब कम होना शुरू हो गई है। इसके साथ ही ग्रामीणों में यह उम्मीद जागने लगी है कि अब वह जल्दी अपने गांव लौट जाएंगे। अब उनकी चिंता रोजी-रोटी को लेकर है। फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। जानवरों के लिए भूसा आदि खराब हो चुका है। जगह-जगह पानी भरने से कीचड़ फैली हुई है। इसके चलते भिनभिनाते मच्छर और दुर्गंध की स्थिति बनी हुई है।
स्वास्थ्य विभाग लगातार राहत शिविर लगाकर लोगों के उपचार में लगा है। दर्जनों लोग यहां पर संक्रामक बीमारियों से ग्रसित हैं। उसावां सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक राहुल सिद्धार्थ ने बताया कि उनकी टीम ने लगभग सभी बाढ़ पीड़ित गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाया है। पानी तो कम हुआ है, लेकिन भू कटान जारी है। अटैना, जसवंत नगला, अहमद नगर बचौरा में कटान हो रहा है। संवाद
20 साल बाद सोन सिवारक गांव में आई बाढ़
दहगवां। विकास खंड दहगवां के ग्राम सोन सिवारक में एक बार फिर से बाढ़ आ गई है। गांव के रास्ते में पानी भर चुका है। बाइक अथवा अन्य वाहनों से निकलना मुश्किल हो गया है। लोग पानी में पैदल ही निकल रहे हैं। वहीं बच्चों को कंधे पर बैठाकर रास्ता पार कराना पड़ रहा है।
किसान हेतराम ने बताया कि 20 साल पहले गांव में बाढ़ आई थी, जिसकी असर तीन तक रहा था। इस बार पानी फिर से आ गया है। इससे गांव वालों को परेशानी खड़ी हो गई है। किसान किशनलाल ने बताया कि खेत डूब चुके हैं। कई पक्के व कच्चे मकानों के किनारे पानी आ गया है। इससे मकानों को खतरा पैदा हो गया है। पशुओं को चारा लाने में भी दिक्क़तें हो रहीं हैं। गांव से बीमार लोगों को दवा लेने आने-जाने में भी परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है। संवाद
कटान जारी, बाढ़ ने छोड़ी कीचड़ और खेतों में सड़ी फसलें
- पालतू पशुओं में खुरपका और मुंहपका की बीमारियां फैलने की आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
दातागंज। रामगंगा में पानी कम होने के कारण कीचड़ बढ़ गई है। खेतों में खड़ी फसलों के बीच जहां पानी जमा हुआ था उसके कम होने के कारण फसलें सड़ी हुई निकल रहीं हैं। कीट-पतंगों के साथ मच्छरों की समस्या बढ़ गई है। इससे संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा पैदा हो गया है।
चारा सड़ जाने पर और गंदगी में पालतू पशुओं के विचरण करने से उनको खुरपका और मुंहपका की बीमारियां फैलने का खतरा बन गया है। रामगंगा में पानी कम होते ही कटान ने जोर पकड़ लिया है। गांव शेरा बछलिया में रामगंगा कटान कर रही है।
रविवार तक इस गांव में 150 बीघा खड़ी फसलों वाली जमीन पानी में समा गई। पिछली रात से 50 बीघा जमीन और कट गई है। कटान अभी जारी रहने के कारण बाढ़ क्षेत्र के किसानों के दिल बैठे जा रहे है। इस गांव के वीरेशपाल सिंह की चार बीघा, छोटेलाल की पांच, धर्मपाल की आठ, इफ्तार और नरेश पाल की चार-चारअवनीश शेरा की छह और प्रियम सिंह की 12 बीघा समेत 50 बीघा से अधिक फसलों वाली जमीन बाढ़ में समा गई।
रविवार को 11 किसानों के खेत कट गए थे। सबसे बड़ी ग्राम पंचायत कुंडरा मजरा के सात गांव हैं। यहां के प्रधान कपल सिंह ने बताया कि पानी कम होने पर खेतों में सड़ी फसल निकल रही है। बाढ़ क्षेत्र के लोगों को खाज-खुजली, बुखार, जुकाम की शिकायतें शुरू हो गई हैं।
पशुओं में भी रोग फैलने का खतरा है। हालांकि म्याऊं स्वास्थ्य केंद्र से स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार बाढ़ क्षेत्र में दवाएं वितरित कर रहीं हैं। हैंडपंपों को पानी दूषित हो जाने के कारण नवादावदन, शेरपुर पट्टी, बिजा, हर्रामपुर, कठमोरा, नौनी टिकन्ना में बीमारियों ने दस्तक दे दी है।
पूर्व विधायक धर्मेंद्र शाक्य ने बाढ़ क्षेत्र का किया दौरा
बदायूं। शेखूपुर विधानसभा से भाजपा के पूर्व विधायक धर्मेंद्र शाक्य ने कादरचौक ब्लॉक में बाढ़ क्षेत्र के ग्राम ललसी नगला, मजरा गंगबरार, गनियाई, पांडेय नगला, इंद्राई नगला, तोल्या नगला, ननाखेड़ा और रामनगला समेत कई गांवों में दौरा किया। उन्होंने लोगों का हाल जाना और शासन से हर संभव सहायता दिलाने का आश्वासन दिया। उनके साथ ब्लॉक प्रमुख वीरेंद्र राजपूत, प्रधान मिंटो शाक्य, प्रधान चिंरोजी, राजू प्रधान, योगेश मौर्य समेत अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे। संवाद
विधायक हरीश शाक्य ने बांटी राहत सामग्री
बदायूं। बिल्सी विधायक हरीश शाक्य ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र ग्राम मंगली की मड़ैया एवं मोहन नगला में राहत सामग्री वितरित की। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि किसी को भी परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने अधिकारियाें को चेताया कि बाढ़ पीड़ित परिवारों की दैनिक जरूरतों का ध्यान रखें। हर संभव मदद प्रदान करें। इस अवसर पर मुनीश राघव, प्रशांत शर्मा, कामता प्रसाद शाक्य, मुनेंद्र शाक्य, योगेश तोमर, मुनीश शाक्य, चरन सिंह शाक्य, राहुल कश्यप, दिनेश यादव एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। संवाद
उसहैत क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों को दवा देती स्वास्थ्य विभाग की टीम। संवाद
उसहैत क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों को दवा देती स्वास्थ्य विभाग की टीम। संवाद
उसहैत क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों को दवा देती स्वास्थ्य विभाग की टीम। संवाद
उसहैत क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों को दवा देती स्वास्थ्य विभाग की टीम। संवाद
उसहैत क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों को दवा देती स्वास्थ्य विभाग की टीम। संवाद