बदायूं। बिल्सी थानाक्षेत्र के गांव शहजाद नगर खेड़ा में बृहस्पतिवार रात सो रहे बुजुर्ग के सिर पर धारदार हथियार के प्रहार कर हत्या कर दी गई। बड़े बेटे की तहरीर पर पुलिस ने पिता-पुत्र समेत तीन पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज की हैं। हत्या की वजह गाली गलौज बताई गई है, लेकिन पुलिस अन्य बिंदुओं पर भी जांच कर रही है।
थानाक्षेत्र के गांव शहजाद नगर खेड़ा में निवासी किसान रामपाल शर्मा (65) बृहस्पतिवार रात घर के चारपाई पर सो रहे थे। इसी दौरान पड़ोस के रहने वाले वीरपाल की बेटी की बरात चढ़ने लगी। रात करीब 10 बजे किसान का बेटा मुनेंद्र बरात देखने के लिए घर से बाहर गया। उसने चारपाई पर पिता रामपाल शर्मा को खून से लथपथ देखा। उसकी चीख सुनकर परिवार के अन्य लोग मौके पर आ गए। ग्रामीणों ने देर रात ही पुलिस को सूचना दी। सूचना पर इंस्पेक्टर मनोज कुमार व क्राइम इंस्पेक्टर वीके मौर्या घटनास्थल पर पहुंचे।
पुलिस ने परिजनों से पूछताछ की। बड़े बेटे बृजेश शर्मा ने बताया कि शाम के समय गांव का रेवाराम घर के सामने गाली गलौज कर रहा था। इस वजह से पिता ने उसे टोक दिया था। इससे बौखला उसने पिता से गाली गलौज भी की। जान से मारने की धमकी दी, लेकिन ग्रामीणों के हस्तक्षेप से उस दौरान मामला शांत हो गया था। बताया कि पिता की हत्या करने के बाद रेवाराम, उसका बेटा प्रेम और भतीजे पवन भाग गए। बृजेश शर्मा की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
बिल्सी क्राइम इंस्पेक्टर वीके मौर्य ने बताया किसान की किसी धारदार हथियार से सिर में प्रहार करके हत्या की गई है। बेटे की तहरीर पर तीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई हैं। हत्या की वजह गाली गलौज के दौरान हुआ विवाद बताया जा रहा है।
किसान और हत्यारोपी के घर की 300 मीटर की दूरी
परिजनों ने बताया कि किसान और हत्यारोपी के घर का करीब 300 मीटर का फासला है। शुक्रवार की सुबह परिजन आरोपियों की तलाश में उसके घर तक गए तो घटनास्थल से लेकर उसके घर तक के दरवाजे पर खून से धब्बे जमीन पर दिखाई दिए। परिजनों ने आशंका जताई है कि हत्यारोपी हत्या करने के बाद घर के अंदर गए, लेकिन उसके बाद से भाग गए।
मुख्य हत्यारोपी ने ग्रामीणों का किया जीनामुहाल
पोस्टमॉर्टम हाउस पर किसान के परिजनों समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि हत्यारोपी रेवाराम गांव का सबसे खुराफाती इंसान है। उसका आए दिन किसी ने किसी से विवाद रहता है। उसने कई ग्रामीणों को बेवजह पीटा है।
इसी चारपाई पर सो रहे थे रामपाल। संवाद
इसी चारपाई पर सो रहे थे रामपाल। संवाद