नोटबंदी भी नहीं डिगा सकी किसानों का जज्बा
पूस की बर्फीली रातें और जेठ की तपती दुपहरी जिस किसान का जज्बा नहीं डिगा सकीं, उसे नोटबंदी क्या डिगा पाएगी। इसे सच साबित करते हुए जिले के किसानों ने रबी की बुवाई का लक्ष्य लगभग पूरा कर लिया है, जबकि अभी देरी से बोई जाने वाली प्रजातियों का गेहूं बोने में 10 दिन शेष हैं। इससे किसानों ने विपरीत समय में अपनी हिम्मत को कायम रखने के जज्बे को दिखाकर रबी की फसलों की बुवाई की।
रबी की बुवाई का सीजन नवंबर के पहले सप्ताह से शुरू होता है। इसमें अगैती प्रजातियों की बुवाई नवंबर के प्रथम सप्ताह से 25 नवंबर तक होती है। विलंब से बोई जाने वाली प्रजातियां की फसल बुवाई 25 नवंबर से 25 दिसंबर तक होती है। अति विलंब से बोई जाने वाली प्रजातियों की बुवाई 10 जनवरी तक होती है। नवंबर के पहले सप्ताह में ही यानि कि आठ नवंबर की रात को प्रधानमंत्री मोदी ने हजार और पांच सौ के पुराने के नोटों के प्रचलन को बंद कर दिया था।
नोटबंदी होने से सभी वर्गों के साथ किसानों को परेशानी थी। रबी सत्र 2016 के लिए 308879 हेक्टेयर का लक्ष्य शासन से जिले को निर्धारित किया गया था। तब आशंका जताई जा रही थी कि इस बार लक्ष्य पूरा नहीं हो पाएगा, लेकिन किसानों ने जज्बा दिखाते हुए 297715 हेक्टेयर में फसलों की बुवाई दिसंबर खत्म होने से पहले कर ली है, जो लक्ष्य का 95.43 फीसदी है। अब केवल साढ़े चार फीसदी लक्ष्य बचा है, जिसके लिए 10 दिन अभी बाकी हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बुवाई का लक्ष्य तो दिसंबर के पहले सप्ताह में ही पूरा हो जाएगा। शेष तीन दिनों में अतिरिक्त बुवाई भी हो जाएगी।
रबी की फसलों का विवरण
फसल का नाम लक्ष्य प्राप्ति
1. गेहूं 257974 242550
2. जौ 554 555
3. चना 10 10
4. मटर 1504 1510
5. तोरिया 12181 12200
6. राई/सरसों 27586 28850
कुल 308879 297715
नोट: आंकड़े हेक्टेयर में दिए गए हैं।
खाद बीज की खरीद में पुराने नोट संचालित किए जाने की छूट के साथ ही निजी दुकानों से किसानों ने उधार लेकर भी बुवाई की है। नोटबंदी के इस दौरान में किसानों का यह जज्बा काबिले-ए-तारीफ है। किसानों को विभाग की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं का पूरा लाभ दिया जा रहा है।
आरपी चौधरी, कृषि उपनिदेशक