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अंग्रेजी और देसी ब्रांड की नकली शराब बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़, धंधेबाज के पास से माल बरामद

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उझानी (बदायूं)। एल्कोहल में केमिकल मिलाकर देसी और अंग्रेजी शराब बनाने की फैक्ट्री सोमवार शाम पुलिस और आबकारी विभाग की टीम की संयुक्त कार्रवाई के दौरान पकड़ी है। कार्रवाई के दौरान एक धंधेबाज को मौके से दबोच लिया गया जबकि दो लोग दबिश की भनक लगते ही भाग निकले। पुलिस ने भारी मात्रा में शराब की बोतलें, क्वाटर और हाफ के साथ नकली शराब, ढक्कन, नकली बार कोड के स्टिकर, कैरेमल कलर केमिकल बरामद किया है। काफी समय से चल रहे इस धंधे में लिप्त लोग थोक का व्यापार बताकर आसपास के जिलों में नकली शराब बेचा करते थे।
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कोतवाली पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने कछला से सटे बहोरानगला गांव में सोमवार देर शाम दबिश दी। बहोरानगला में कई साल से रह रहे अलीगढ़ के पाली थाना क्षेत्र के गांव मुकीमपुर निवासी विजय सिंह यादव पुत्र रामनिवास के घर में छापामार कार्रवाई के दौरान देसी और अंग्रेजी शराब बनाते समय गृहस्वामी को दबोच लिया गया। उसके कमरे में कई ब्रांड देसी और अंग्रेजी शराब के नकली बार कोड के स्टिकर मिले। बरामद उपकरणों और सामान में नकली बार कोड के करीब 12 सौ स्टिकर, दो सौ लीटर एल्कोहल, एक लीटर कैरेमल कलर केमिकल, पांच सौ से अधिक क्वाटर, सैकड़ों ढक्कन, सवा सौ बीयर केन और अंग्रेजी शराब के कई ब्रांड की बोतलें, यूरिया और तीन सौ हाफ शामिल हैं।
पूछताछ के दौरान धंधेबाज विजय ने पुलिस को बताया कि वह मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव पालपुर निवासी विक्रम सिंह पुत्र नक्षत्रपाल और मूसाझाग थाना क्षेत्र के गांव किसरूआ के जसवीर पुत्र एकराम के साथ काफी समय से नकली शराब बनाने का धंधा करता है। विक्रम और जसवीर पुलिस कार्रवाई की भनक लगते ही मौके पर से भाग गए। धंधेबाजों के तार आसपास जिलों से जुड़े बताए गए हैं। नकली शराब बनाने की फैक्ट्री पकड़ने वाली टीम में आबकारी निरीक्षक हरीनारायण यादव, कोतवाली पुलिस के दरोगा संजय सिंह, लोकेंद्र कुमार भाटी समेत आठ पुलिस कर्मी शामिल रहे।
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कलर केमिकल और यूरिया की मात्रा अधिक होने से घातक हो सकती है नकली शराब
उझानी। बहोरानगला में नकली शराब की फैक्ट्री में वह सबकुछ सामान मिला जो शराब बनाने में इस्तेमाल होता है। सूत्र बताते हैं कि नकली शराब बनाने के धंधे से जुड़े लोग कभी शराब की दुकानों पर सेल्समैन हुआ करते थे। 50 लीटर एल्कोहल में आधा लीटर कैरेमल कलर केमिकल और यूरिया को पानी में घोल करीब तीन सो बोतलें तैयार की जा सकती हैं। हालांकि धंधेबाजों के पास नकली शराब की तीव्रता मापने का कोई उपकरण नहीं होता लेकिन एक अंदाज से सब कुछ करते रहे हैं। बताते हैं कि कैरेमल कलर केमिकल और यूरिया की मात्रा अधिक हो जाए तो नकली शराब जहरीली भी हो सकती है। इसको पीने से मौत भी हो सकती है। आबकारी विभाग के अफसर इसे अच्छी तरह जानते हैं। दरअसल, वैवाहिक कार्यक्रमों में शराब खपाने के लिए पिछले कुछेक महीनों से धंधे ने बड़ा रूप ले लिया था। कोई शक नहीं कर पाए, इसलिए धंधेबाज शराब कंपनियों में पैंठ बताकर थोक में माल खरीदकर लाने की बात कहते रहे हैं।
नकली शराब बनाने की फैक्ट्री पकड़ी गई है। जो दो धंधेबाज फरार हैं, उनकी तलाश की जा रही है। तीनों धंधेबाजों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर गिरफ्तार आरोपी को जेल भेज दिया गया है। शराब का नमूना जांच को प्रयोगशाला में भेजा जा रहा है।
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- ओमकार सिंह, प्रभारी निरीक्षक।
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