दिव्यांग कांवड़िया बनवारी लाल। संवाद
उझानी/ कछला। भक्ति जब हिलोर मारे तो शारीरिक अक्षमता भी आड़े नहीं आती। फिर बारिश हो या फिर तूफान आए, कदम रूक नहीं पाते। बरेली में कैंट निवासी दिव्यांग बलवीर सिंह को ही देख लीजिए। भोले के जयकारे लगाते हुए वह ट्राई साइकिल से गंगाघाट पर पहुंचे और आस्था की डुबकी लगाकर शिव मंदिर की ओर निकल पड़े।
दोनों पैर से दिव्यांग कांवड़िये बलवीर सिंह ने बताया कि कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह शारीरिक रूप से अक्षम हैं। पिछले साल भी कांवड़ यात्रा पूरी की थी। उन्होंने कोई मनौती नहीं मांगी, लेकिन भगवान भोलेनाथ के भक्त हैं। उन्होंने अपना कमरा भी शंकर- पार्वती के चित्रों से रजा रखा है। बोले- उनके पास ट्राई साइकिल है। उसी से घाट पर पहुंचे और कांवड़ यात्रा पूरी करने में ट्राई साइकिल का सहयोग रहेगा। उनकी ट्राई साइकिल इलेक्ट्रिक नहीं, बल्कि हाथ से चलाने वाली है। बलवीर सोमवार को कैंट इलाके के बालाजी मंदिर में जलाभिषेक करेंगे। रास्ते में कांवड़ियों ने भी उनका उत्साह बढ़ाया। पिछले साल गंगाघाट से शिव मंदिर तक का सफर करने में उन्हें करीब 50 घंटे लगे थे।
भोले के जयकारों से गूंजा कछला घाट
- कांवड़ यात्रा शुरू करने से पहले शिवभक्तों के कछला गंगाघाट पर पहुंचने का सिलसिला पूरे दिन रहा। टोलियों में पहुंचे शिवभक्तों ने आस्था की डुबकी लगाने के बाद गंगा मइया और कांवड़ का पूजन किया। पीलीभीत निवासी कांवड़िया सुदर्शन लाल ने बताया कि हाईवे भी कांवड़ियों के जयकारों से गूंजता रहा। कुछेक टोलियों के साथ कलाकार भी थे। नृत्य करते कलाकारों के साथ कांवड़िया भी झूम उठे।
दिव्यांग कांवड़िया बनवारी लाल। संवाद
दिव्यांग कांवड़िया बनवारी लाल। संवाद