गंगा की सैकड़ों बीघा जमीन पर लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। गुरुवार को राजस्व निरीक्षकों की अगुवाई में अवैध कब्जे वाली जमीन की पैमाइश करने पहुंची राजस्व विभाग की टीम को बैरंग लौटना पड़ा। वजह यह रही कि मौके पर अभिलेखों के आधार पर नक्शे का मिलान नहीं हो सका। पैमाइश का पता लगने पर जमा हुए ग्रामीण मौके पर घंटों डटे रहे।
कोतवाली क्षेत्र में ढकनगला और चंदनपुर के अलावा हुसैनपुर खेड़ा के आसपास गंगा पार कटरी में करीब डेढ़ हजार बीघा जमीन पर गेहूं और सरसों की फसल खड़ी हुई है। आरोप है कि पड़ोसी जिला कासगंज में सोरों कोतवाली क्षेत्र के गांव मानपुर नगरिया के कुछ लोगों ने जमीन पर कब्जा कर रखा है। ढकनगला और चंदनपुर के कई ग्रामीण उसमें से काफी जमीन पर मालिकाना हक का दावा भी कर चुके हैं। इसमें कुछ जमीन सरकारी भी बताई गई। आरोप-प्रत्यारोप के बीच गुरुवार पूर्वाह्न में राजस्व और पुलिस कर्मियों की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची तो कटरी में दोनों पक्ष के लोगों का जमघट लग गया। राजस्व निरीक्षक सुरेशपाल और रामनिवास मिश्रा ने लेखपालों के साथ नक्शे का अभिलेखों से मिलान शुरू किया तो विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न हो गई। चूंकि तहसीलदार सदर आरपी चौधरी को भी पैमाइश कराने के लिए मौके पर पहुंचना था लेकिन जिला मुख्यालय में व्यस्तताओं की वजह से वह नहीं पहुंच पाए। सूत्रों का कहना है कि पैमाइश में फसलें भी आड़े आ रही हैं। राजस्व कर्मचारी भूमि पर अवैध कब्जा चिह्नित भी कर देते तो भी कब्जा मुक्त कराना मुश्किल हो जाता। फसल उजाड़ने या फिर नीलाम करने के लिए भी प्रशासनिक अनुमति आवश्यक थी। इसकी वजह से पुलिस और राजस्व विभाग की टीम को बैरंग होना पड़ा। बता दें कि तीन दिन पहले जमीन पर कब्जे को लेकर ही मानपुर नगरिया के लोगों ने खेतों की ओर पशु लेकर पहुंचे चरवाहों को फायरिंग कर खदेड़ दिया था।
अगली बार कासगंज के अफसरों से मांगेंगे सहयोग
उझानी। गंगापार कटरी की कृषि योग्य भूमि को कब्जा मुक्त कराने के लिए राजस्व विभाग जल्द ही कोई ठोस कदम उठाएगा। राजस्व निरीक्षक रामनिवास मिश्रा कहते हैं कि मानपुर नगरिया के जो लोग कटरी की भूमि पर मालिकाना हक जताते रहे हैं, उसकी असलियत तभी सामने आएगी जब कासगंज जिले के राजस्व कर्मचारी भी पैमाइश के दौरान मौके पर पहुंचें। इसके लिए तहसीलदार सदर के जरिए कासगंज जिले के अफसरों से सहयोग मांगा जाएगा।
नक्शा और अभिलेखों में भूमि को लेकर विरोधाभाव की स्थिति है। जो लोग सरकारी भूमि पर भी मालिकाना हक जता रहे हैं, वास्तव में उनकी जमीन बाढ़ के दौरान गंगा की भेंट चढ़ चुकी है। जल्द ही पैमाइश का काम पूरा कर जमीन को कब्जा मुक्त करा दिया जाएगा।
- सुरेशपाल, राजस्व निरीक्षक, कछला