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कमजोर नहीं हैं बेटियां, हर क्षेत्र में बढ़ रहीं हैं आगे और आगे
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। अब महिलाएं अबला नहीं हैं। जीवंत और मजबूत राष्ट्र के निर्माण में महिलाओं के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। कहते हैं कि जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। भारतीय संस्कृति में महिला के सम्मान को बहुत महत्व दिया गया है। कई महिलाओं ने कठिन परिश्रम करके खुद को सशक्त बनाया है। वे कहती है कि शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़कर खुद हो मजबूत और सशक्त बनाएं। तभी समाज की दिशा व दशा में और ज्यादा सुधार होगा। साथ ही नारी का सम्मान भी और अधिक बढ़ जाएगा। जिले की कई महिलाएं अपने-अपने क्षेत्र और समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान कर रही हैं।
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पांचों बेटियां लहरा रहीं हैं शिक्षा महकमे में परचम
बदायूं। कहते हैं कि समाज में कुछ ऐसे माता-पिता होते हैं जो बेटे और बेटियों में अंतर नहीं समझते हैं। हर माता-पिता की यही तमन्ना रहती है कि उसके बच्चे खुद के पैरों पर खड़े होकर समाज में नजीर बनें। ओमप्रकाश वर्मा व शीलबाला ऐसे सौभाग्यशाली माता-पिता हैं जिनकी पांचों बेटियों ने शिक्षक बनकर समाज में उदाहरण प्रस्तुत किया है। शहर के डीएम रोड स्थित पटेलनगर में रहने वालीं उनकी सबसे बड़ी बेटी प्रतिभा सिंह जूनियर हाईस्कूल में कार्यरत हैं। बाकी चारों बहनें सुदीक्षा सिंह, अर्चना सिंह, आरती सिंह और मधुबाला भी शिक्षक हैं। सभी ने एमएससी करने के साथ ही बीएड किया है। उनके अलावा सभी बहनें आगरा में कार्यरत हैं।
बकौल प्रतिभा सिंह, पांच बहनें और एक भाई होने के बाद भी उनके माता-पिता ने उनकी पढ़ाई में किसी तरह की कमी नहीं रखी। उसी का परिणाम है कि आज सभी बहनें शिक्षक हैं। उनका कहना है कि समाज में महिला को अनेक नाम से पुकारा जाता है। यही महिला नारी कहलाती है तो कभी स्त्रत्त्ी तो कभी औरत। प्रतिभा सिंह ने कहा कि महिला को चाहे किसी नाम या रूप में देखा जाए लेकिन हमारे समाज में बिना महिलाओं के सहयोग के संपूर्ण विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है।
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कुछ और महिलाओं की कहानी उनकी जुबानी
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आगे बढ़ने में पिता ने हमेशा दिया साथ: शर्मिला
बदायूं। कोई भी महिला तभी आगे बढ़ सकती है जब उसका परिवार पूरी तरह से उसके साथ हो। बेटा और बेटी में किसी तरह का अंतर नहीं रखा जाए। ऐसा ही उनके पिता ने किया। यह कहना है महिला थाने की एसओ शर्मिला शर्मा का। बताया कि वह तीन बहन और तीन भाई हैं। जिनमें वह सबसे छोटी हैं। बचपन से ही पुलिस में भर्ती होने का सपना देखती थीं। इस सपने के बारे में उन्होंने अपने माता-पिता को बताया। पिता जो कि रिटायर्ड बीडीओ रहे सो उन्होंने उनके आगे बढ़ने में पूरी मदद की। वह 2010 में पुलिस में दरोगा के पद पर चयनित हुईं। इसके बाद वह बरेली के सुभाषनगर चौकी प्रभारी बनीं। कैंट में महारानी आशा ज्योति केंद्र की रिपोर्टिग इंचार्ज रहीं।
24 जून 2017 से यहां पर महिला थाने की इंचार्ज हैं। साथ ही एंटी रोमियो स्कवॉड टीम की भी इंचार्ज हैं। कहना है कि आज उन्हें इस बात पर गर्व है कि वह पुरुषों से किसी भी मामले में पीछे नहीं हैं।
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कंचन: खेल जगत में कर रही हैं नाम रोशन
बदायूं। अब महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। जरूरत है तो सिर्फ आत्म विश्वास की। बेसिक में शिक्षक के पद पर तैनात कंचन सक्सेना ने कहा कि यदि कोई मन में यह ठान लें कि उसे किसी भी क्षेत्र में नाम करना है तो वह कर सकतीं हैं। बोली-उन्होंने 40 साल की उम्र में पॉवर लिफ्टिंग में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीता है और जल्द ही वह राजस्थान में होने वाली एशियाई चैम्पियनशिप में देश की ओर से प्रतिनिधित्व करेंगी। कंचन ने कहा कि देश की कई महिलाएं हैं जिन्होंने कठिन परिश्रम करके अपने क्षेत्र में नाम कमाया है। जिसकी वजह से उन्हें समाज में सम्मान की नजर से देखा जाता है।
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अब महिलाएं नहीं रहीं कमजोर, हो गईं हैं सशक्त: दीपमाला
बदायूं। शहर की प्रथम नागरिक चेयरमैन दीपमाला गोयल कहतीं हैं कि अब महिला कमजोर नहीं है। वह कई मामलों में पुरुषों से भी ज्यादा सशक्त है। महिला के पास सोचने और कार्य करने की क्षमता भी ज्यादा होती है। महिला अब अबला नहीं है। जो उसे दबाया जा सके। उनका बेटियों को संदेश है कि वह ज्यादा से ज्यादा पढ़ाई करें। जिस किसी भी क्षेत्र का चयन करें चाहे वह प्रशासनिक हो या फिर राजनीति का। उसमें पूर्ण मनोयोग से काम करें। उसे सफलता अवश्य मिलेगी। तब उसका सम्मान और भी ज्यादा बढ़ जाएगा।
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शिक्षा की ज्योति जलाना मुख्य उद्देश्य: चयनिका
बदायूं। शहर के मदर एथेना स्कूल की प्रबंध निदेशक चयनिका सारस्वत कहतीं हैं कि शिक्षा ही एक ऐसी चीज होती है जिससे विकास के पथ पर जाया जा सकता है। सो वह भी शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहीं हैं। उन्होंने कहा कि हर माता-पिता को चाहिए वह बेटियों को ज्यादा से ज्यादा शिक्षा दिलाएं ताकि वह मजबूत बन सकें। उनमें किसी तरह का भेदभाव न करें। महिला का सम्मान होगा तभी समाज और राष्ट्र आगे बढ़ेगा।