बदायूं। पार्वती आर्य कन्या इंटर कॉलेज में अमर उजाला के अपराजिता 100-मिलियन स्माइल्स के तहत नारी सशक्तीकरण विषय पर एक कार्यक्रम किया गया। मुख्य अतिथि कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक जसवीर सिंह ने छात्राओं को उनकी सुरक्षा के संबंध में कई अहम जानकारियां दीं। उन्हें सीख दी कि जीवन में अगर समस्याएं है तो उनके समाधान भी हैं। बेटियों को दिल पर बोझ रखने के बजाय अपने माता-पिता का विश्वास हासिल करना चाहिए। उनकी अधिकांश समस्याओं का समाधान माता-पिता आसानी से कर सकते हैं, गंभीर मामला हो तो तत्काल पुलिस का सहयोग लें।
सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में इंस्पेक्टर जसवीर सिंह ने कहा कि सरकार लगातार महिला सुरक्षा के लिए कड़े नियम बना रही है। उन पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। थानों में महिलाओं-छात्राओं की समस्या पहले और सबसे अलग सुनी जाने की व्यवस्था करके महिला हेल्प डेस्क बनाई गई है। यहां कभी भी छात्राएं पहुंचकर अपनी समस्या बता सकती हैं। उस पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि छात्राएं पुलिस के कई हेल्पलाइन नंबर भी प्रयोग कर सकती हैं। कहीं भी दिक्कत हो तो तुरंत 112 पर पुलिस को कॉल करें।
प्रधानाचार्य मधु शर्मा ने कहा कि छात्राएं कहीं भी खुद को कमजोर महसूस न करें। उनके लिए लगातार कार्यक्रम आयोजित कराए जा रहे हैं। अमर उजाला पिछले कई साल से महिला सशक्तीकरण पर जोर दे रहा है। अमित आलोक ने भी छात्राओं को जागरूक करने के विषय में जानकारी दी। इस दौरान किरनबाला, नीतू सिंह, ज्योति वर्मा, अनितमा सोनी, गीतांजलि, नीलम आर्या, रीना सिंह, लक्ष्मी, अरुण राठौर, विभाग सागर, गुंजन आदि मौजूद रहे।
बदनामी के डर से चुप रहती हैं छात्राएं
बहुत सी महिलाएं या छात्राएं ऐसी होती हैं जो बदनामी के डर से अपने परिवारवालों को कुछ नहीं बतातीं। उन्हें कम से कम अपने परिवारवालों को समस्या जरूर बतानी चाहिए। उनकी समस्या कहीं और से नहीं बल्कि परिवार वाले ही हल कराएंगे।- दीक्षा वर्मा
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अपनी शक्ति पहचाननी होगी
महिलाओं को अपनी शक्ति पहचाननी होगी। वह इधर-उधर न भटककर सीधे थाने जाएं। महिला हेल्प डेस्क पर अपनी समस्या बताएं। पुलिस भी उनकी शिकायत को प्राथमिकता से ले। तभी महिला अपराध संबंधी मामलों में कमी आएगी।- वैष्णवी वर्मा
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परिवार भी रखे बेटियों का ख्याल
भले ही बेटियां बड़ी हो जाएं लेकिन परिवारवालों को समय-समय पर उन पर ध्यान देना चाहिए। उनके विद्यालयों में जाकर अध्यापकों से बात करें। उनकी पढ़ाई-लिखाई कैसी चल रही है। इस पर भी बात करें, अधिकांश परिवारवाले भी बेटियों की समस्याओं से अनजान रहते है। - आशा देवी
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गुड टच-बैड टच भी सिखाएं
अब स्कूलों में लगातार समझाया जा रहा है कि गुड टच क्या है और बेड टच क्या है। इससे छोटे बच्चे भी आसानी से लोगों की मानसिकता को पढ़ सकते हैं। हम सब लोगों को इस पर ध्यान देना चाहिए। परिवार वाले भी अपने बच्चों को ऐसी बातों के बारे में बताएं। - आंचल