बदायूं। जिले में हृदय रोग विशेषज्ञों की कमी लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं के लिए चुनौती बनी हुई है, लेकिन अब शासन ने हार्ट अटैक के मरीजों को जिलास्तर पर उपचार देने की व्यवस्था की है। इसके तहत जिले को 15 टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे गंभीर मरीजों को आपातकाल में तुरंत जीवनरक्षक उपचार मिल सकेगा।
जिले में जिला अस्पताल के अलावा बिल्सी, बिसौली, उझानी, सहसवान, दातागंज सीएचसी पर यह इंजेक्शन उपलब्ध रहेगा। स्वास्थ्य विभाग ने इस अभियान के लिए एमएलयू अलीगढ़ को हब बनाया है। यहां से जिले भर में हृदय रोग मरीजों की निगरानी, ईसीजी विश्लेषण और इंजेक्शन देने की अनुमति तय की जाएगी।
नोडल अधिकारी के रूप में एसीएमओ डॉ. निरंजन को जबकि सह-नोडल अधिकारी के तौर पर डॉ. राजवीर को चुना गया है। दोनों अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है ताकि वे आपात स्थितियों में सही दिशा-निर्देश जारी कर सकें। इसके अलावा हार्ट अटैक की स्थिति में तुरंत निर्णय बेहद जरूरी होता है। इसलिए जिले के इस संबंधित अस्पतालों मेें तैनात एक-एक चिकित्साधीक्षक, स्टाफ नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ को विशेष ट्रेनिंग दी गई है।
प्रशिक्षण में बताया गया कि हृदय रोगी की पहचान कैसे की जाए, ईसीजी कैसे पढ़ी जाए, मरीज की स्थिति का मूल्यांकन किस प्रकार हो। इसके अलावा इमरजेंसी में एक बेड केवल हृदय रोगियों के लिए आरक्षित रखा जाएगा।
इन अस्पतालों को मिले इंजेक्शन
जिला अस्पताल को सबसे अधिक पांच टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन दिए गए हैं। इसके अलावा जिले के पांच सीएचसी बिल्सी, बिसौली, उझानी, सहसवान, दातागंज को दो-दो इंजेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। इससे दूरदराज के मरीजों को भी उपचार के लिए जिला अस्पताल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
ईसीजी की फोटो से होगा निर्णय, अलीगढ़ हब से मिलेगी हरी झंडी
हार्टअटैक के लक्षण दिखाई देने पर अस्पताल में सबसे पहले मरीज का ईसीजी किया जाएगा। इसके बाद ईसीजी की फोटो मोबाइल से खींचकर एमएलयू अलीगढ़ हब के ग्रुप में भेजी जाएगी। वहां मौजूद विशेषज्ञ तस्वीर का विश्लेषण करेंगे और तय करेंगे कि मरीज की स्थिति इंजेक्शन देने लायक है या नहीं। विशेषज्ञों की हरी झंडी मिलते ही प्रशिक्षित स्टाफ तुरंत इंजेक्शन देकर उपचार शुरू कर देगा।
विशेषज्ञ न होने पर भी अब नहीं रुकेगा जीवनरक्षक उपचार
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिले में हृदय रोग विशेषज्ञ की कमी होने के बावजूद यह नई व्यवस्था मरीजों के लिए वरदान साबित होगी। अब किसी भी गंभीर मरीज को शहर के बड़े अस्पतालों में ले जाने के बजाय निकटतम सीएचसी या जिला अस्पताल में ही उपचार मिल सकेगा। इससे समय बचेगा और मरीज की जान बचाने के अवसर बढ़ेंगे।
जिला अस्पताल के अलावा जिले में पांच सीएचसी को शामिल किया गया है। जहां पर टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन को रखा जाएगा। -डॉ. रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ